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    बच्चों-युवाओं के मन से गणित के डर को भगाना ही बना लिया नीलकंठ भानु ने अपना लक्ष्य

    By Sanjay PokhriyalEdited By:
    Updated: Sat, 05 Mar 2022 01:30 PM (IST)

    हैदराबाद के नीलकंठ भानु प्रकाश को गणित इतना पसंद है कि वे कैलकुलेटर से भी तेज गति से गणना कर सकते हैं। दिल्ली के सेंट स्टीफंस कालेज से ग्रेजुएट भानु के नाम 50 से अधिक लिम्का बुक आफ अवार्ड्स हैं।

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    हैदराबाद के नीलकंठ भानु प्रकाश के अनुसार, हर किसी में एक न्यूमेरिकल कंपीटेंसी होती है।

    नई दिल्ली, अंशु सिंह। ‘भांजु’ एक मैथ्स एडटेक स्टार्टअप है जिसे हैदराबाद के नीलकंठ भानु प्रकाश ने शुरू किया है। हाल ही में कंपनी ने ‘लाइटस्पीड वेंचर पार्टनर्स’ की ओर से 2 मिलियन डालर (करीब 15 करोड़ रुपये) का फंड प्राप्त किया है। इस सीड फंड से वह कंपनी को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाना चाहते हैं। नीलकंठ की मानें तो बहुत से युवा वह करना चाहते हैं, जो उन्होंने किया। इसलिए उनकी मैथ्स में रुचि जगाने और उसमें आगे बढ़ने में मदद करने के लिए इस कंपनी की शुरुआत की गई है। आज ‘भांजु’ के जरिये वे तीस हजार से अधिक स्टूडेंट्स एवं उनके पैरेंट्स का विश्वास प्राप्त करने में सफल रहे हैं। इनका इरादा वैश्विक स्तर पर स्टूडेंट्स तक पहुंचने का है। नीलकंठ भानु वही हैं जिन्होंने मात्र 17 वर्ष की आयु में जानी-मानी गणितज्ञ शकुंतला देवी का रिकार्ड तोड़ा था और उन्हें विश्व के सबसे तेज ‘मानव कैलकुलेटर’ का खिताब मिला था। भानु खुद को जन्मजात जीनियस नहीं मानते औऱ न ही उनका इस पर कोई विश्वास है। 

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    बहुत से बच्चों को जिस एक सब्जेक्ट से डर लगता है, जिससे वे दूर भागते हैं, वह है गणित। नीलकंठ भानु को इसका अच्छी तरह आभास था। इसलिए उन्होंने बच्चों-युवाओं के मन से इस डर को निकालने, उनका आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए उन्हें नये-नये तरीकों से मैथ्स पढ़ाना शुरू किया। नतीजा यह हुआ कि जो मैथ्स से भागते थे, वे आज कुछ सेकंड्स में ही स्पीड कैलकुलेशन अपने दिमाग में ही कर लेते हैं। स्पीड कैलकुलेशन के अलावा भानु बच्चों के बुनियादी ज्ञान को भी ठोस आधार देने की कोशिश करते हैं। इससे स्टूडेंट्स ‘स्टेम’ (एसटीईएम यानी साइंस, टेक्नोलाजी, इंजीनियरिंग, मैथ्स) सब्जेक्ट्स को आसानी से सीख पाते हैं। स्टूडेंट्स को मैथ्स के जरिये टेक्नोलाजी के कांसेप्ट, आर्ट, साइंस, म्यूजिक, कोडिंग एवं एआइ की जानकारी दी जाती है। भानु का कहना है कि स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले मैथ्स और बाहरी दुनिया में उसके होने वाले उपयोग के बीच कोई संबंध नहीं है। बच्चे इसे एक बोरिंग विषय मानते हैं। उन्हें नहीं बताया जाता कि लैंग्वेज की तरह मैथ्स भी अहम विषय होता है। लेकिन वह न्यूमरेसी एवं लिटरेसी को बच्चों के विकास की नींव मानते हैं। भानु कहते हैं, ‘भारत में साक्षरता पर अधिक जोर दिया जाता है, न्यूमरेसी पर नहीं। इसे बदलने की जरूरत है। बच्चों में मैथ्स के डर को दूर करने के उद्देश्य से मैंने कोचिंग प्लेटफार्म ‘एक्सप्लोरिंग इंफिनिटीज’ की शुरुआत की। इसके जरिए स्कूलों में ट्रेनिंग प्रोग्राम किया। बच्चों को बताया कि कैसे मजे-मजे में गणित की पढ़ाई की जा सकती है। जैसे, मैं उनसे पूछता हूं कि क्या वे मैथ्स गेम खेलना पसंद करेंगे? उनका तत्काल जवाब आता है, क्यों नहीं? मैंने कुछ गेम्स भी क्रिएट किए हैं। अब तक हमने एक लाख से अधिक बच्चों के मैथ्स के डर को दूर करने में सफलता पायी है।‘

    देसी-विदेशी स्टूडेंट्स तक पहुंचने का इरादा वर्ष 2020 में ब्रिटेन में आयोजित ‘माइंड स्पोर्ट्स ओलंपियाड’ जीतने वाले पहले एशियाई बनने के बाद नीलकंठ भानु ने उसी वर्ष ‘भांजु’ की नींव रखी। इसका एकमात्र उद्देश्य वैश्विक स्तर पर गणित को लेकर डर को दूर करना है। साथ ही, स्टूडेंट्स को बताना है कि वे मैथ्स की मदद से एक बेहतर दुनिया का निर्माण कर सकते हैं। भांजु एक एडटेक प्लेटफार्म है जहां स्टूडेंट्स को मैथ्स का एक इनोवेटिव करिकुलम मिलता है। इससे वे करीब चार गुना तेजी से गणित सीख पाते हैं। इससे लाखों स्टूडेंट्स को लाभ मिला है। उनकी काग्निटिव क्षमता का विकास हुआ है। भानु बताते हैं, ‘अब तक के अपने सफर में मैंने कई रिकार्ड्स बनाए हैं। सम्मान हासिल किया है। चार साल मैथ्स पढ़ाने के बाद मुझे एहसास हुआ कि जब हम स्टूडेंट्स की जिज्ञासाओं को शांत करते हैं, तो उसका काफी अच्छा परिणाम मिलता है। इसलिए अपने प्लेटफार्म के लिए हमने काफी सोच-विचार के बाद मैथ्स का करिकुलम तैयार किया है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की मदद से तैयार की गई मेथोडोलाजी से स्टूडेंट्स को सीखने में आसानी होगी। वे रियल वर्ल्ड यानी अपनी आम जिंदगी में मैथ्स का प्रयोग कर सकेंगे। ‘भांजु’ की लाइव क्लासेज से भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन एवं मध्य एशिया के स्टूडेंट्स भी लाभ उठा सकेंगे। मैं बच्चों एवं युवाओं को खेल-खेल में मैथ्स सिखाने का पक्षधर हूं, ताकि वे भविष्य के चिंतनशील लीडर बन सकें।‘

    एक चोट जिसने बदल दी जिंदगी : भानु जब पांच वर्ष के थे, तब उनके सिर में चोट लग गई थी। एक साल तक बिस्तर पर रहे। उनके पैरेंट्स को डाक्टरों ने कहा था कि उनकी देखने-सुनने व समझने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। तभी से उन्होंने अपने दिमाग को व्यस्त रखने के लिए मेंटल मैथ्स कैलकुलेशन करना शुरू किया था। वे पजल साल्व करते और उसी से सीखकर आगे बढ़ते। बताते हैं भानु, ‘भारत के किसी आम मध्यवर्गीय परिवार से आने वाले युवाओं से आमतौर पर यही अपेक्षा होती है कि अच्छी नौकरी लेकर आराम से जिंदगी गुजारें या फिर अपना कारोबार शुरू कर लें। मेरा अंकों की तरफ रुझान था और सामने थे दो विकल्प- मैथ्स के प्रति डर खत्म कर सकूं या मैथ्स के डर के साथ सभी को जीने दूं। मैंने पहले विकल्प को चुना। लाखों स्टूडेंट्स में मैथ्स के प्रति लगाव पैदा करने का फैसला किया। एडटेक शुरू करने के पीछे यही प्रमुख वजह रही। इसमें परिवार का पूरा साथ मिला। उन्होंने हमेशा प्रोत्साहित किया।‘