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जेल में नहीं दी जा सकती है वैवाहिक मुलाकात की इजाजत

जेल प्रशासन ने हलफनामा दाखिल करके कहा कि जेल के अंदर सीमित संसाधन हैं और वहां पर कैदियों को वैवाहिक मुलाकात की अनुमति देना व्यावहारिक नहीं है।

By JP YadavEdited By: Published: Sat, 23 Nov 2019 10:32 AM (IST)Updated: Sat, 23 Nov 2019 10:32 AM (IST)
जेल में नहीं दी जा सकती है वैवाहिक मुलाकात की इजाजत

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। जेल में कैदियों को उनके वैवाहिक मुलाकात का अधिकार देने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर जेल प्रशासन ने दिल्ली हाई कोर्ट में शुक्रवार को जवाब दाखिल किया। जेल प्रशासन ने हलफनामा दाखिल करके कहा कि जेल के अंदर सीमित संसाधन हैं और वहां पर कैदियों को वैवाहिक मुलाकात की अनुमति देना व्यावहारिक नहीं है। तिहाड़ जेल महानिदेशक ने कहा कि परिवार और सामाजिक कार्यों के लिए कैदियों को पैरोल व फरलो के जरिये राहत दी जाती है और इस समय उन्हें वैवाहिक मुलाकात का अधिकार स्वत: मिल जाता है। अब इस मामले पर मुख्य पीठ 26 फरवरी को सुनवाई करेगी।

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दिल्ली सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल संजय घोष के माध्यम से जेल प्रशासन ने दाखिल हलफनामे में कहा कि एक कैदी पैरोल, फरलो या फिर अंतरिम जमानत पर परिवार व वैवाहिक मुलाकात के अधिकार का इस्तेमाल कर सकता है। साथ ही कैदियों को उनकी पत्नी, परिवार के अन्य सदस्य एवं अधिवक्ता से मुलाकात करने की अनुमति दी जाती है।

जेल प्रशासन ने याचिकाकर्ता के इस दावे को खारिज किया कि जेल के अंदर वैवाहिक मुलाकात का अधिकार देने से यौन अपराध कम हो सकता है। उसका कहना है कि दिल्ली जेल एक्ट-2000 और दिल्ली जेल नियम-2018 जेल के अंदर वैवाहिक मुलाकात के अधिकार की अनुमति नहीं देती है।

जेल प्रशासन ने तर्क दिया कि प्रतिदिन जेल के अंदर 1200 लोग कैदियों से मुलाकात करने आते हैं, ऐसे में वैवाहिक मुलाकात का अधिकार देना संभव नहीं है, क्योंकि जेल में सीमित संसाधन हैं। इतना ही नहीं, याचिकाकर्ता अमित साहनी के अलावा जेल के अंदर बंद किसी भी कैदी ने ऐसी मांग नहीं की है।

याचिकाकर्ता व अधिवक्ता अमित साहनी ने दिल्ली सरकार व तिहाड़ जेल के डीजी को जेल में वैवाहिक मुलाकात के लिए जेल में अनिवार्य व्यवस्था का निर्देश देने की मांग की है। उन्होंने याचिका में कहा कि कैदियों को वैवाहिक मुलाकात के अधिकार नहीं दिए जा रहे हैं, जबकि अधिकतर जेल में सेक्सुअल एक्टिव आयु वर्ग के कैदी हैं। पैरोल व फरलो के अलावा एक कैदी को उसकी पत्नी से निजी तौर पर मिलने से नहीं रोका जा सकता। वैवाहिक मुलाकात कैदी का मौलिक व मानवाधिकार है।

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