नई दिल्ली [शुजाउद्दीन]। मीडिया जगत में एक चमकता सितारा लॉकडाउन में आसमान से जब जमीं पर गिरा तो मानों सपने तार तार हो गए। जिंदगी गुजारने के लिए छोटे चैनल में काम करना शुरू किया, लेकिन लोगों के ताने खंजर की तरह चुभने लगे तो। ये ताने एंकर प्रिया जुनेजा के दिमाग में इस कदर घर कर गए कि छोटे चैनल की नौकरी, नौकरी सी न लगी और परेशान होकर मौत को गले लगा लिया। परिवार के मुताबिक,  पिछले तीन दिन से वह अपने घर में चुन्नी लेकर घुम रही थी, शुक्रवार को अकेला पाकर अचानक चुन्नी से लटकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि प्रिया जुनेजा एक अच्छा अदाकार थी, लेकिन थिएटर का सबसे बड़ा सबक 'The show Must Go On' ही भूल गई।

परिवार से मिली जानकारी के मुताबिक, दिल्ली विश्विद्यालय के डॉ. भीम राव अंबेडकर कॉलेज से 2017 में प्रिया ने पत्रकारिता की थी। कॉलेज से डिग्री हासिल करते ही प्रिया ने मीडिया जगत में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। प्रिया न केवल एंकर थीं, बल्कि एक अच्छी अदाकारा भी थीं। कॉलेज के छात्राें के एक समुय द्वारा बनाए गए कई संगीत एल्बम में प्रिया ने अपने किरदार से खूब वाहवाही लूटी।

प्रिया के कॉलेज के दोस्तों ने बताया कि प्रिया के चेहरे पर सिर्फ मुस्कान ही देखी है, इसी साल पत्रकारिता विभाग के एक कार्यक्रम में वह मुख्य अतिथि बनकर आई थीं। मार्च में नौकरी जाने के बाद वह अपने भविष्य को लेकर परेशान रहने लगी थीं। एक छोटे चैनल में नौकरी मिली तो लोग उसे ताने मारने लगे। परिवार से जुड़े सदस्यों ने बताया कि प्रिया सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहती थी, लेकिन पिछले काफी समय से उसने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना छोड़ दिया था। वह अवसाद में थी, एक से दो बार मानव व्यवहार व संबद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास) में उसकी काउंसलिंग भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं हुआ।

डॉ. निमेष जी देसाई (निदेशक, इहबास) का कहना है कि यह घटना दुखद है, मुझे जानकारी नहीं की प्रिया इहबास में काउंसलिंग के लिए कब आईं। बहुत कम लोग आर्थिक तंगी की वजह से आत्महता करते हैं। किसी की बातों में नहीं आना चाहिए, अवसाद में हो तो अपने दोस्तों व परिवार के सदस्यों से बात करनी चाहिए। जान देने जैसा कदम कभी नहीं उठाना चाहिए।

Posted By: JP Yadav

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