RIP Surekha Sikri: जानिये- किसका नाटक देखकर थियेटर के प्रति आकर्षित हुई थीं सुरेखा सीकरी
RIP Surekha Sikri अलीगढ़ मुस्लिम विवि में पढ़ाई के दौरान इब्राहिम अल्काजी का नाटक देखकर ही सुरेखा सीकरी थियेटर के प्रति आकर्षित हुई थी और एनएसडी में दाखिला लिया था। सुरेखा सीकरी थियेटर के साथ साथ टीवी और फिल्म जगत में खासी चर्चित रहीं।

नई दिल्ली [संजीव कुमार मिश्र]। टीवी जगत में दादी सा के नाम से प्रसिद्ध अभिनेत्री सुरेखा सीकरी ने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) से स्नातक किया था। एनएसडी ने ट्वीट कर श्रद्धांजलि अर्पित की। ट्वीट में लिखा- एनएसडी की वरिष्ठ स्नातक (1968 में) सुरेखा सीकरी के निधन की खबर बेहद दुखद हैं। उनका जाना भारतीय रंगमंच के लिए अपूरणीय क्षति है। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित सुरेखा सीकरी का रंगमंच से गहरा नाता था। कहते हैं अलीगढ़ मुस्लिम विवि में पढ़ाई के दौरान इब्राहिम अल्काजी का नाटक देखकर ही वो थियेटर के प्रति आकर्षित हुई थी और एनएसडी में दाखिला लिया था। सुरेखा सीकरी थियेटर के साथ साथ टीवी और फिल्म जगत में खासी चर्चित रहीं। धारावाहिक 'बालिका वधु' और फिल्म 'बधाई हो बधाई' में उनके अभिनय को खूब सराहा गया। शुक्रवार को उनका मुंबई में निधन हो गया।
बहुत सवाल पूछती थीं
प्रसिद्ध थियेटर निर्देशक प्रो एमके रैना सुरेखा सीकरी के जूनियर थे। जब एमके रैना ने दाखिला लिया तो सुरेखा सीकरी एनएसडी रेपर्टरी से जुड़ गई थी। वो करीब दस साल तक रेपर्टरी से जुड़ी रहीं। एम के रैना बताते हैं कि रेपर्टरी के एक नाटक में सुरेखा सीकरी को डायरेक्ट करने का मौका मिला। नाटक जगदीश चंद्र माथुर के प्रसिद्ध उपन्यास कभी ना छोड़े खेत पर आधारित था। इसकी कहानी दो जाटों की लड़ाई पर आधारित थी। एक जाट दूसरे जाट के इकलौते बेटे को मार देता है। जिसका मां का रोल सुरेखा सीकरी जी ने निभाया था। कोर्ट कचहरी के चक्कर में पीसती मां की ममता की पीड़ा को सुरेखा जी ने जीवंत कर दिया था। नाटक देखने वाले भावूक हो गए थे। एमके रैना कहते हैं कि सुरेखा जी, सवाल बहुत पूछती थी। हर दृश्य के पहले वो सवाल पूछती। मुझे उनको जवाब से संतुष्ट करना पड़ता। पहले पहल तो मुझे लगा कि मैं जूनियर हूं, इसलिए वो तंग कर रहीं हैं। लेकिन बहुत जल्द समझ गया कि वो बेहतर करने के लिए सवाल पूछतीं हैं। इसके बाद मैं हर दृश्य से पहले तैयारी करता, ताकि उनके सवालों का जवाब दे सकूं।
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