जानिए कौन है यशपाल सिंह, जिनके कमरे में बैठकर हो जाता था बिल्डर को मनमाने रेट पर जमीन का आवंटन
यूपीएसआइडीसी में महाप्रबंधक के पद पर तैनात रहे यशपाल सिंह त्यागी को जब नोएडा प्राधिकरण में तैनात किया गया तो उनका एकछत्र राज रहा। किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की हिम्मत नहीं थी कि उनसे बात भी कर सके। उनकी बातचीत सिर्फ चुनिंदा लोगों से बंद कमरे में होती थी।

दिल्ली/ नोएडा, जागरण संवाददाता। यूपीएसआइडीसी में महाप्रबंधक के पद पर तैनात रहे यशपाल सिंह त्यागी को जब नोएडा प्राधिकरण में तैनात किया गया, तो लंबे समय तक उनका एकछत्र राज रहा। किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की हिम्मत नहीं थी कि उनसे बात भी कर सके। उनकी बातचीत सिर्फ चुनिंदा लोगों से बंद कमरे में होती थी। कमरे में जाने से पहले मोबाइल और पैन तक बाहर रखवा लिया जाता था, जिससे कमरे के अंदर हुई बातचीत का कोई भी अंश किसी भी तरीके से रिकार्ड न हो सके।
सूत्र बताते हैं कि जमीन आवंटन का पूर्णाधिकार उनके पास था, जिसे वह चाहते थे, उसी को आवंटन होता था। हालत यह थी कि आवंटन दर भी उनकी मर्जी पर निर्भर करती थी। बंद कमरे में जमीन के आवंटन संबंधी बातचीत होने के बाद कागजी कार्रवाई शुरू होती थी। यह पूर्व में ही निर्धारित कर लिया जाता था कि किस योजना के तहत किस बिल्डर को कौन सा भूखंड आवंटित किया जाएगा। तत्कालीन सीसीईओ ने डीओ लेटर भेजकर यशपाल सिंह की तैनाती नोएडा प्राधिकरण में कराई थी। यशपाल सिंह की शासन में इतनी मजबूत पकड़ थी कि सुबह डीओ लेटर गया और शाम को यशपाल सिंह की तैनाती हो गई। यशपाल सिंह की तूती बोलने का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मीडिया संस्थानों में भी उनकी खासी दखल थी।
अगर कोई उनके खिलाफ कुछ नेगेटिव समाचार लिखने या न्यूज चैनल पर चलाने की हिम्मत करता था, तो उसका नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरण एवं गाजियाबाद विकास प्राधिकरण से सरकारी विज्ञापन तक बंद करा दिया जाता था। किसी भी नेगेटिव खबर को लेकर उनसे बातचीत में साफ कहा जाता था, जो चाहे लिख लो, जो कर सकते हो कर लो, आज तुम करो, कल हम देख लेंगे।
तत्कालीन उच्च अधिकारियों की इतनी हिम्मत नहीं होती थी कि उन्हें बुला सकें, अधिकारी बातचीत करने के लिए खुद उनके कमरे में जाते थे। कमरे के बाहर सरकारी चपरासी के साथ उनके व्यक्तिगत लोग और निजी सुरक्षाकर्मी भी रहते थे, जो कमरे में जाने वाले लोगों की तलाशी लेते थे। चुनिंदा अधिकारी ही ऐसे थे, जिनके पास जाकर वह बातचीत करते थे, अन्यथा सभी अधिकारी उनसे मिलने के लिए समय लेकर जाते थे।
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