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    जानिए सात लाख के इनामी काला जठेड़ी ने सबसे पहले किस वारदात को दिया था अंजाम फिर बढ़ता गया गुनाहों का ग्राफ

    By Vinay Kumar TiwariEdited By:
    Updated: Sun, 01 Aug 2021 09:00 AM (IST)

    जिले के गांव जठेड़ी के सीधे-सादे संदीप को कुख्यात काला जठेड़ी बनने में मात्र 12 साल का वक्त लगा। उसने दिल्ली में 2004 में चोरी से की थी। एक बार जरायम की दुनिया में कदमताल शुरू की तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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    पुलिस को दर्जनों हत्या, लूट, रंगदारी और पुलिस मुठभेड़ जैसे मामलों में उसकी तलाश थी।

    नई दिल्ली/सोनीपत, जागरण संवाददाता। जिले के गांव जठेड़ी के सीधे-सादे संदीप को कुख्यात काला जठेड़ी बनने में मात्र 12 साल का वक्त लगा। उसने पहली वारदात दिल्ली में 2004 में चोरी से की थी। एक बार जरायम की दुनिया में कदमताल शुरू की तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह अलग-अलग क्षेत्रों और राज्यों में वहां के गैंग से हाथ मिलाकर अपनी ताकत बढ़ाता रहा। उसके गैंग के खिलाफ रामकरण बैंयापुर और मोनू लल्हेड़ी गैंग भी एकजुट हुए, लेकिन लारेंस बिश्नोई गैंग अपराध जगत में आगे बढ़ता गया। पुलिस को दर्जनों हत्या, लूट, रंगदारी और पुलिस मुठभेड़ जैसे मामलों में उसकी तलाश थी। उसके गुर्गों ने हरियाणा पुलिस को यह तक पता नहीं लगने दिया कि वह देश में है या विदेश भाग गया है।

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    सोनीपत पुलिस को भी उसकी कई मामलों में तलाश थी। लारेंस बिश्नोई के जेल जाने के बाद उसके गैंग की कमान राजू बसौदी संभाल रहा था। फरवरी में राजू बसौदी के गिरफ्तार होने पर काला जठेड़ी ने गैंग का संचालन संभाल लिया था। जिले में केबल आपरेटर का कारोबार करने वाले संदीप ने अपनी दूसरी आपराधिक वारदात गोहाना में की थी। सोनीपत सहित प्रदेश के कारोबारियों और ठेकेदारों से वसूली उसके गुर्गे कर रहे थे। एक-दो बार क्षेत्र में उसकी सक्रियता की भी अफवाह उड़ी, लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं आया। पुलिस का मानना था कि जठेड़ी का साथी दिल्ली का कपिल सांगवान आजकल इंग्लैंड में रहकर अपना गैंग आपरेट कर रहा है, ऐसे में जठेड़ी भी विदेश चला गया होगा।

    हर घटना बताती थी गैंग का पता

    रंगदारी देने में आनाकानी करने पर चेतावनी देकर गोली मारकर घायल करना और लोगों को भयभीत करने के लिए वारदातों की जिम्मेदारी लेना जठेड़ी गैंग की पहचान थी। गैंग की कमान लारेंस बिश्नोई, राजू बसौदी या काला जठेड़ी किसी के हाथ में रही हो, अपराध करने का तरीका एक जैसा ही रहा। हत्या करने की घटना में जहां 15 से 30 तक गोली मारी जातीं, तो पुलिस अधिकारी समझ जाते कि वारदात को अंजाम इसी गैंग ने दिया होगा। यह गैंग कई बार अपने खिलाफ खड़े होने वाले गवाहों की भी उतनी ही बेरहमी से हत्या करता था। धमकी, रंगदारी, फायरिंग, लूट, हत्या, गिरफ्तारी और फरारी काला जठेड़ी के लिए खेल बन गया था।

    काला जठेड़ी पर दर्ज मुकदमे

    - दिल्ली के बादली में 30 सितंबर, 2004 को चोरी का केस

    - दिल्ली के डाबड़ी में 19 जनवरी, 2007 में हत्या का अभियोग

    - रोहतक में सांपला में 18 जून, 2009 को जानलेवा हमला, हत्या

    - सोनीपत के गोहाना में 18 जनवरी 2010 में हत्या का केस

    - रोहतक के सांपला में 13 मई, 2010 को हत्या का मुकदमा

    - सोनीपत के राई में 26 नवंबर, 2010 को जानलेवा हमला, हत्या

    - दिल्ली के रोहिणी में 2011 में आ‌र्म्स एक्ट व धमकी देने के मुकदमे

    - दिल्ली के बेगमपुर में 24 फरवरी, 2011 में आइपीसी की धारा के 382, 482 तहत केस

    - कैथल में 22 अप्रैल 2011 में जानलेवा हमला

    - कैथल में नौ मई, 2011 को धमकी देना, हमला करना

    - सोनीपत के राई में 15 जुलाई, 2011 को डकैती, आ‌र्म्स एक्ट के केस

    - सोनीपत के राई में 25 जुलाई, 2011 को लूट व आ‌र्म्स एक्ट के मुकदमे

    - रोहतक के सांपला में 13 दिसंबर, 2012 में हत्या

    - जींद के जुलाना में 27 फरवरी, 2012 में हत्या

    - दिल्ली के बेगमपुर में नौ मार्च, 2012 को लूट, हमला

    - दिल्ली के नरेला में 10 मार्च, 2012 को लूट, मारपीट

    - झज्जर के बहादुरगढ़ में 10 मार्च, 2012 में जानलेवा हमला, हत्या

    - झज्जर में 13 जून, 2012 में धमकी व आ‌र्म्स एक्ट के केस

    - सोनीपत के राई में आठ अप्रैल, 2013 में हत्या

    - सोनीपत में 13 नवंबर, 2017 में हत्या

    - रोहतक के सांपला में 18 अप्रैल, 2013 में हत्या

    - रोहतक के सांपला में 13 नवंबर, 2017 में हत्या

    - सोनीपत में 28 अप्रैल, 2018 में हत्या

    - सोनीपत में छह फरवरी, 2019 में हत्या