नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। वर्ष-2001 में अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (World Trade Center) पर हुए आतंकी हमले (9/11) के बाद पूरी दुनिया में सुरक्षा को लेकर बहुत बड़ी चिंता और चुनौती खड़ी हो गई थी। देश की राजधानी होने के नाते दिल्ली में भी बहुत से देशों के राष्ट्राध्यक्षों व वीवीआइपी मेहमानों का आना-जाना लगा रहता है। आतंकी हमले के बाद से ऐसे वीवीआइपी की सुरक्षा-व्यवस्था को लेकर सरकार व सुरक्षा एजेंसियों की चौकसी कई गुना बढ़ गई थी। 

इसी के मद्देनजर दिल्ली में एक विशेष उच्च सुरक्षित वीवीआइपी लाउंज की जरूरत महसूस की गई। पालम एयरपोर्ट पर बीएसएफ ने अपने हैंगर में इस लाउंज को बनाने का प्रस्ताव गृह मंत्रालय से मंजूर करवाया। अति सुरक्षित क्षेत्र होने के कारण निर्माण कार्य में सीमित संख्या में ही मजदूरों को लगाया जा सकता था।

प्रोजेक्ट से संबंधित मजदूरों से लेकर इंजीनियर, आर्किटेक्ट, डिजाइनर व हेल्पर आदि के उच्च सुरक्षा वाले पहचान पत्र बनवाए गए। काम पर आने के दौरान करीब डेढ़ से दो घंटा सुरक्षा जांच में ही बीत जाता था। बाहर से निर्माण सामग्री पहुंचाना, उसकी जांच करना आदि बहुत बड़ी चुनौती थी।

इन सब विसंगतियों के बावजूद बीएसएफ और ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों के सहयोग से 96 दिन के रिकॉर्ड समय में प्रोजेक्ट पूरा कर इसे फरवरी-2002 में बीएसएफ को सौंप दिया गया। रक्षा मंत्रालय और बीएसएफ के अधिकारियों ने पूरी टीम की तारीफ की। हालांकि अब इस लाउंज का उपयोग अन्य सामान्य कामों के लिए भी किया जाता है।

सुरक्षा का रखा गया पूरा ध्यान

करीब 120 वर्गमीटर का यह वीवीआइपी लाउंज एयरपोर्ट के पहले से बने भवन में बनाया गया था। यह वास्तुकला और इंटीरियर डिजाइनिंग का एक नायाब नमूना था, क्योंकि सुरक्षा कारणों से इसके निर्माण कार्य में बहुत ज्यादा लोगों को शामिल नहीं किया जा सकता था। एयरपोर्ट पर बने हुए ढांचे के साथ छेड़छाड़ किए बिना सीमित बजट में वह सारी संरचना करनी थी, जिसकी बीएसएफ ने मांग की थी। इस लाउंज का सबसे अहम मकसद था कि किसी विदेशी राष्ट्रध्यक्ष के साथ देश के प्रधानमंत्री से लेकर सेना के बड़े अधिकारियों तक से मीटिंग हो या कोई हाई प्रोफाइल मीटिंग हो तो किसी को कानोंकान खबर न लगे।

भव्य व हाईटेक सुविधाओं से लैस

यह बाहर से जितना अभेद्य और गोपनीय था, अंदर से उतना ही भव्य व अंतरराष्ट्रीय स्तर की हाइटेक सुविधाओं से लैस। इसमें कांफ्रेंस रूम, सीटिंग लाउंज, टॉयलेट, पैंट्री, वीडियो कांफ्रेंसिंग रूम के अलावा ठहरने के लिए भी जगह बनाई गई थी। लाउंज की दीवारों पर विशेष रूप से हस्तनिर्मित फैब्रिक पर बनी पेंटिंग लगाई गई थी। लाउंज में बीएसएफ का ध्वज व लोगो भीलगाया गया था। निर्माण कार्य के लिए सामग्री, फर्नीचर, सजावटी सामान से लेकर बिजली केउपकरण तक की खरीद में पूरी सावधानी बरती गई थी। वर्ष-2001 में कम ऊर्जा खर्च करने वाले बिजली उपकरण का इस्तेमाल करना बड़ी बात थी। इससे पहले हमने सुरक्षाबलों के लिए काम किया था। उन कामों को हमने रिकॉर्ड समय में पूरा किया था, इसलिए पुराने कामों को देखते हुए मुझे ये प्रोजेक्ट मिला था।

(लेख सुमन कुमार गुहा से अरविंद कुमार द्विवेदी की बातचीत पर आधारित) 

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Posted By: JP Yadav

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