नई दिल्ली/गाजियाबाद, जेएनएन। अक्षय कुमार और भूमि पेडनेकर अभिनीत फिल्म 'टॉयलट एक प्रेमकथा' हकीकत में दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश की लोनी में दोहराई गई है। दरअसल, दिल्ली की रहने वाली कोमल ने लोनी के निठौरा गांव की बहू बनने के बाद टॉयलेट बनवाने की ऐसी जिद ठानी की उसकी ससुराल के लोग ही नहीं बल्कि ग्राम प्रधान झुक गए। फिर हुआ यह कि ग्राम प्रधान ने पूरे गांव में तकरीबन 300 टॉयलेट बनवा दिए और इसकी प्रेरणा बनीं दिल्ली की रहने वाली और अब यूपी की बहू कोमल। 

नार्वे की पीएम ने कहा, 'वेलडन कोमल'

अपनी जिद के चलते 300 टॉयलेट बनवाने वालीं कोमल इन दिनों चर्चा में हैं। दरअसल, मंगलवार को निठौरा गांव में प्राथमिक विद्यालयल पहुंचीं नॉर्वे की प्रधानमंत्री एरना सोलबर्ग ने कोमल से मुलाकात की। इस दौरान जब उन्होंने कोमल के जज्बे की कहानी सुनी तो उन्होंने तुरंत से कहा- 'वेलडन कोमल'। नार्वे की प्रधानमंत्री एरना सोलबर्ग और यूनिसेफ की भारतीय प्रतिनिधि डॉ. यासमीन अली हक ने सोमवार को निठौरा गांव के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों का निरीक्षण किया था। 

...इसलिए बने टॉयलेट 

बताया जाता है कि दिल्ली की रहने वाली कोमल 2017 में लोनी के निठौरा गांव में बहू बनकर आईं। दिल्ली जैसे मेट्रो शहर में रहने वाली कोमल ने जब यहां पर आकर टॉयलेट की कमी महसूस की तो उन्हें खुद पर गुस्सा आया। इसके बाद खुले में शौच के खिलाफ बनी फिल्म 'टॉयलेट एक प्रेमकथा' की तर्ज पर लोनी के निठौरा गांव की बहू कोमल ने साफतौर पर खुले में शौच करने से मना कर दिया।

कोमल के मुताबिक, जून 2017 में वह दिल्ली के दक्षिणपुरी से बादल कुमार के साथ शादी कर गांव निठौरा आई थीं। शादी की अगली सुबह जब वह खुले में शौच करने गईं तो लोग वहां खड़े थे। यह देख वह वापस लौट आईं। कोमल ने बताया कि मैंने उसी दिन तय कर लिया था कि खुले में शौच के लिए कभी नहीं जाऊंगी।

कोमल की यह जिद ससुराल से होते हुए गांव और फिर ग्राम प्रधान तक पहुंची। फिर क्या था दिल्ली की कोमल की जिद के आगे ससुराल वालों के साथ ग्राम प्रधान को भी झुकना पड़ा। कोमल से प्रेरित होकर प्रधान ने गांव में 250 शौचालय बनवा दिए हैं। कोमल की वजह से वर्तमान में टॉइलट बनने के बाद गांव के अधिकांश लोगों ने खुले में शौच करना बंद कर दिया है। यह भी सच है कि कोमल की इस लड़ाई में ने केवल अन्य लड़कियां, बल्कि गांव की बहुओं ने भी साथ दिया। 

वहीं, कोमल की इस कोशिश को लेकर नार्वे की पीएम ने कहा कि सेनिटेशन का मतलब सिर्फ शौचालय बनाने भर से नहीं है, बल्कि महिलाओं को माहवारी के दौरान सुविधा प्रदान करना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्हें पता चला है कि माहवारी के चलते किशोरावस्था में परिजन छात्राओं को स्कूल नहीं भेजते। अब स्कूलों में शौचालय बनने से इसमें बदलाव आया है।

राजनीति में हुई भागीदारी तो देश मजबूत होगा

राजनीति व संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी तो देश मजबूत होगा क्योंकि जो महिलाएं घर चलाना जानती हैं, वे देश और अच्छी तरह से चला सकती हैं। उन्होंने केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन और बेटी बचाओ जैसे कार्यक्रमों की प्रशंसा की। साथ ही कहा कि राजनीति से अलग होकर इस तरह के कार्यक्रम चलने चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को चाहिए कि हम दो हमारे दो के स्थान पर हम दो हमारी दो बेटियों का नारा दें। बेटियां किसी भी स्तर पर बेटों से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि महिला अपराध सिर्फ भारत में ही नहीं नॉर्वे और अन्य देशों में भी है। सभी देशों को महिला अपराध के प्रति नजरिया बदलने और कोर्ट सिस्टम तक को बदलने की जरूरत है।

स्कूल सुपरविजन के लिए बनाए दीक्षा एप की ली जानकारी

इस दौरान एरना सोलबर्ग ने स्कूली बच्चों की पढ़ाई और उपस्थिति आदि की जांच के लिए बनाए एप दीक्षा की भी जानकारी ली। यूनिसेफ की टीम ने उन्हें दीक्षा के बारे में बताया। साथ ही किस तरह से एप के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बच्चों की उपस्थिति, ड्रॉप आउट बच्चों को स्कूल लाने के प्रयास किए जा रहे हैं, इसकी जानकारी मिल सकेगी।

आज़ादी की 72वीं वर्षगाँठ पर भेजें देश भक्ति से जुड़ी कविता, शायरी, कहानी और जीतें फोन, डाउनलोड करें जागरण एप

Posted By: JP Yadav