'आप' में छिड़े घमासान के बीच, जानें- कैसे होता है राज्यसभा के सांसद का चुनाव
16 जनवरी को दिल्ली की तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव है। राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। राज्यसभा कभी भंग नहीं होती।
नई दिल्ली [जेएनएन]। राज्यसभा चुनाव को लेकर दिल्ली की सियासत में घमासान मचा हुआ है। 'आप' की तरफ से उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद पार्टी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। दो कारोबारियों को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाए जाने का फैसला 'आप' के मुखिया अरविंद केजरीवाल के गले की फांस बनता जा रहा है। 16 जनवरी को दिल्ली की तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव है यह तीनों सीटें कांग्रेस की हैं। दिल्ली में विधानसभा में 66 सीटें 'आप' की है ऐसे में यह तय है कि दिल्ली की यह सीटें 'आप' के खाते में ही जाएंगी।
भारत की संसद के तीन अंग
'आप' में छिड़ी सियासी महाभारत के बीच एक सवाल हमेशा मन में आता है कि आखिर राज्यसभा का चुनाव होता कैसे है। तो अब हम आपको इसी सवाल का जवाब विस्तार से देंगे। हम आपको बताएंगे कि राज्यसभा सांसद कैसे बनते हैं या फिर यह भी कह सकते हैं कि आखिर राज्यसभा के सांसद का चुनाव किस तरह से होता है। इससे पहले कि हम आपको पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दें यह जानना बेहद जरूरी है कि संविधान के अनुसार भारत की संसद के तीन अंग हैं राष्ट्रपति, राज्यसभा, व लोकसभा।
राज्यों की परिषद्
राज्यसभा के सांसद का चुनाव कैसे होता है ये जानने से पहले राज्यसभा के बारे कुछ बातें जानना बेहद आवश्यक है। राज्यसभा राज्यों की परिषद् है, जिसके माध्यम से संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होता है। राज्यसभा अप्रत्यक्ष तौर से लोगों का प्रतिनिधित्व करती है, क्योंकि इसके सदस्यों का निर्वाचन राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता है। राज्यसभा के सदस्यों के निर्वाचन में आनुपातिक पद्धति के अनुसार 'एकल संक्रमणीय मत प्रणाली' का प्रयोग किया जाता है।
राज्यसभा का स्वरूप
संविधान में राज्यसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या निर्धारित की गई है। इसमें से राज्यों व संघ राज्य क्षेत्रों के 238 प्रतिनिधि और राष्ट्रपति द्वारा 12 मनोनीत प्रतिनिधि हो सकते हैं। अनुच्छेद 84 के तहत भारत का नागरिक होने के अलावा राज्यसभा की सदस्यता हेतु न्यूनतम आयु 30 वर्ष तय की गई जबकि निचले सदन लोकसभा के लिए यह 25 वर्ष है। संविधान के अनुच्छेद 102 में दिवालिया और कुछ अन्य वर्ग के लोगों को राज्यसभा सदस्य बनने के लिए अयोग्य घोषित किया गया है। जन प्रतिनिधित्व क़ानून की धारा 154 के अनुसार राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। हर 2 साल में इसके एक तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं इसलिए राज्यसभा कभी भंग नहीं होती।
राज्यसभा सांसद कैसे बनते हैं
हाल के दिनों में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलकों में गहमागहमी रही है। राजनीतिक दल अपनी जीत को लेकर कोई भी दांव आजमाने से परहेज नहीं कर रहे हैं। आम लोगों के बीच भी इन चुनावों को लेकर उत्सुकता बनी रहती है, लेकिन ज्यादातर लोगों को यह नहीं पता होता कि आखिर राज्यसभा सांसदों का चुनाव होता कैसे है। तो आइए, हम आपको बताते हैं कि राज्यसभा चुनाव की पूरी प्रक्रिया।
हर दो साल बाद होता है चुनाव
राज्यसभा संसद का सर्वोच्च सदन है। लोकसभा में पास हुआ कोई भी विधेयक तब तक कानून नहीं बन पाता जब तक राज्यसभा उसे दो तिहाई बहुमत से पास न कर दे। इसलिए राज्यसभा में बहुमत किसी भी सरकार के लिए अहम होता है। राज्यसभा में कुल 238 सदस्य चुने जाते हैं, जबकि राष्ट्रपति अधिकतम 12 सदस्य नॉमिनेट कर सकते हैं। इनमें से हर 2 साल में एक तिहाई सदस्यों का कार्यकाल खत्म होता है, इसलिए उतनी सीटों के लिए चुनाव होते हैं। राज्यसभा के चुनाव की प्रक्रिया बाकी सभी चुनावों से काफी अलग होती है।
ऐसे समझें पूरी प्रक्रिया
पूरी प्रक्रिया समझने के लिए उत्तर प्रदेश का उदाहरण लेते हैं। उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधायक हैं और यहां से 11 राज्सयभा सदस्यों का चुनाव होना है तो हर सदस्य को कितने विधायकों का वोट चाहिए ये तय करके लिए कुल विधायकों की संख्या को 11 सीटों में 1 जोड़कर विभाजित किया जाता है यानी 403 बटा 12 यानी 33 और फिर इसमें 1 जोड़ दिया जाता है यानी 34। मतलब ये हुआ कि यूपी से किसी भी सदस्य को राज्यसभा पहुंचने के लिए कम से कम 34 वोटों की जरूरत होगी।
प्राथमिकता वोट का अहम रोल
यही नहीं हर विधायक अपना वोट प्राथमिकता के हिसाब से देता है। मसलन अगर 12 उम्मीदवार मैदान में हैं तो हर विधायक को बताना होगा कि उसकी पहली पसंद कौन है दूसरी पसंद कौन और इसी तरह सभी 12 उम्मीदवारों के लिए अपनी प्राथमिकता बतानी होगी। इस तरह से जिस उम्मीदवार को पहली प्राथमिकता के 34 वोट मिल गए वो जीत जाता है और जिसे नहीं मिलते उसके लिए चुनाव होता है।
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