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नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। दिल्ली में एक बार फिर 4-15 नवंबर तक ऑड-ईवन योजना (Odd-Scheme) लागू करने का ऐलान हुआ है। शुक्रवार को दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने बाकायदा पत्रकार वार्ता करके इस बाबत जानकारी दी कि प्रदूषण पर वार के मद्देनजर दिल्ली में ऑड-ईवन स्कीम लागू करने का फैसला लिया गया है। आइये हम बताते हैं कि आखिर क्यों पूर्व की तरह इस बार भी ऑड-ईवन स्कीम की प्रासंगिकता पर सवाल उठ रहे हैं। 

1. महिलाओं-बाइक सवारों को छूट पर सवाल

नवंबर, 2017 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने एनजीटी ने सवाल उठाते हुए आदेश दिया था कि ऑड-ईवन के दौरान दो पहिया वाहनों, सरकारी कर्मचारियों और महिलाओं को छूट क्यों दी जाती है। 

2. स्कीम से कम नहीं होता वायु प्रदूषण

इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन की उप निदेशक डॉ. राधा गोयल एक साल पहले ही कह चुकी हैं कि ऑड-ईवन यातायात व्यवस्था को सुचारू बना सकता है, लेकिन वायु प्रदूषण कम नहीं कर सकता।

3. टेरी की बात में भी है दम

टाटा एनर्जी रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी टेरी के एक्सपर्ट भी यही कहते हैं कि दिल्ली की हवा का साफ होना या गंदा होना सिर्फ दिल्ली जैसे छोटे से भूभाग से तय नहीं होता। हवा का साफ या गंदा होना पूरे रीजन, पूरे देश और तो और पूरे महाद्वीपों के हालात पर निर्भर करता है। बताया जाता है कि हरियाणा के रोहतक से गाजियाबाद तक का सफर तय करने में हवा को 20 मिनट से ज्यादा नहीं लगते यानी एक जगह का प्रदूषण दूसरी जगह पहुंचना मामूली सी बात है।

4. हवा में सुधार नहीं तो स्कीम क्यों

वर्ष- 2017 में पूरे एनसीआर की आधी गाड़ियां घरों में रखवा लेने के बावजूद 15 दिन साफ सुथरी हवा के नहीं रहे, जाहिर है इसके पीछे वजह कुछ और है। विशेषज्ञ लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि जब इससे प्रदूषण में कोई खास बदलाव नहीं आता है, तो इसे बार-बार लागू क्यों किया जाता है।

5. बाइक से होता है 33 फीसद प्रदूषण

दिल्ली की सड़कों पर 55 लाख दुपहिया वाहन दौड़ते हैं। परिवहन सेक्टर से होने वाले वायु प्रदुषण में एक तिहाई हिस्सेदारी दुपहिया वाहनों की है। दिल्ली में दुपहिए से हाेने वाले वायु प्रदूषण की हिस्सेदारी 32 फीसद है। दिल्ली में नंबर प्लेट की आखिरी संख्या के आधार पर गाड़ी चलाने के नए नियम में इन दुपहिया वाहनों को मुक्त रखा जाता है।

6. एक चौथाई प्रदूषण प्राइवेट कारों से

दिल्ली को प्रदूषित करने में कारों की हिस्सेदारी एक चौथाई है। दिल्ली की सड़कों पर दौड़ रही करीब 23 लाख कारों से वायु प्रदूषण की हिस्सेदारी 22 फीसद है। लेकिन दिल्ली सरकार की प्रदूषण मुक्त दिल्ली के लिए बनाई गई नीति पर सबसे बड़ी गाज कार वाहनों पर पड़ी है

दो बार लगा ऑड-ईवन और रहा फेल

यहां पर बता दें कि दिल्ली में वर्ष- 2015 अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी सरकार बनने के बाद अब तक दो बार ऑड-ईवन फॉर्मूला लग चुका है। पहली बार 1 जनवरी से 15 जनवरी 2016 तक दिल्ली में इस फॉर्मूले का इस्तेमाल हुआ। इसके बाद 15 से 30 अप्रैल के बीच भी दिल्ली में ऑड-ईवन फॉर्मूला लगाया गया। लेकिन दोनों ही बार यह अपने मकसद में उस तरह से सफल नहीं रहा, जैसा इससे उम्मीदें लगाई जा रही थीं।

 

Posted By: JP Yadav

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