नोएडा (आशुतोष अग्निहोत्री)। कहते हैं प्रतिभा परिचय की मोहताज नहीं होती। वह अपने कदमों की आहट से अपने लिए स्थान बना ही लेती है। जरूरत है बस उसे पहचानने की। नोएडा के सेक्टर 120 निवासी वैभव चतुर्वेदी भी कमाल की प्रतिभा के धनी हैं। 23 साल के वैभव 20 से अधिक वाद्ययंत्र बजाते हैं। अपनी ही धुन में मस्त रहने वाले वैभव लोगों को संगीत साधना से परिचय कराने के साथ-साथ जीव हत्या रोकने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं, वहीं कैंसर पीड़ितों के लिए भी अभियान चला रहे हैं।

बचपन से ही थी वाद्य यंत्र बजाने की धुन सवार
सेक्टर 120 की आम्रपाली जॉडिएक सोसायटी निवासी वैभव चतुर्वेदी कहते हैं कि बचपन में जब उन्हें वाद्य यंत्र बजाने की धुन सवार हुई तो पहले किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। पांच-छह लड़कों के ग्रुप में शौक के लिए वह ड्रम बजाते थे। पिछले 18 साल के सफर में आज तक उनके इस ग्रुप से दिल्ली- एनसीआर में करीब एक हजार युवा जुड़ चुके हैं।

सामाजिक पहलुओं पर करते हैं जागरूक
ग्रुप के सदस्य पब्लिक प्लेस में जाकर वाद्ययंत्र बजाते हैं और लोगों को पर्यावरण और जीव संरक्षण सहित तमाम सामाजिक पहलुओं पर जागरूक करते हैं। इनका ग्रुप पैन इंडिया से भी जुड़ा है। ग्रुप के सदस्य जगह-जगह जाकर लोगों को कैंसर की बीमारी से बचाव के बारे में भी जागरूक करते हैं।

कमाल का है स्विटजरलैंड का वाद्ययंत्र हैंडपिन
वैभव जिन वाद्ययंत्रों को बजाते हैं उनमें स्विटरलैंड का बना वाद्ययंत्र हैंडपिन कमाल का है। स्टील से बना यह वाद्ययंत्र देखने में कढ़ाही जैसा लगता है, यह यंत्र हाथ से तैयार किया जाता है। इसे बनाने में कम से कम तीन माह लगते हैं। इसकी फ्रीक्वेंसी दिमाग को शांति देती है।

रूस में मिला यह यंत्र
वैभव कहते हैं कि एक बार टूर पर रूस गए तो वहां उन्हें यह यंत्र मिला। वैभव का दावा है कि इस यंत्र को भारत में केवल वही बजाते हैं। अफ्रीका में बना कलिंबा भी अपने आप में कमाल का है। पाइप फ्लूट, बंबू रैन स्टिक, टैंक ड्रम तमाम ऐसे वाद्ययंत्र हैं जिनकी धुन मन मस्तिष्क को झंकृत कर देती है। स्वच्छता अभियान से प्रेरित वैभव और उनकी टीम इस साल स्वच्छता दिवस पर विशेष करने की तैयारी में है।

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Posted By: Prateek Kumar

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