नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। Kisan Andolan: केंद्र के तीन कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की मांग को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का धरना प्रदर्शन जारी है। किसान किसी भी कीमत पर अपना धरना खत्म करने के लिए तैयार नहीं है। 26 जनवरी को हुए कांड के बाद से धरना स्थल पर भले ही पहले वाली भीड़ नहीं दिख रही है मगर फिर भी किसान आंदोलन को खत्म करने के लिए तैयार नहीं है। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत तो अड़े हुए हैं, वो कह चुके हैं कि किसी भी कीमत पर धरना खत्म नहीं होगा। वो तमाम राज्यों पर जाकर वहां के किसानों से धरने को मजबूत करने की अपील कर चुके हैं। दिल्ली की भयंकर ठंड में भी आंदोलन जारी रहा, अब गर्मी के दिन शुरू हो गए हैं। किसान नेताओं ने अब इस गर्मी को ध्यान में रखते हुए अपने आंदोलन स्थल पर इंतजाम करना शुरू कर दिया है।

यूपी गेट पर हुई बैठक

तीनों कृषि कानूनों के विरोध में 28 नवंबर से यूपी गेट पर चल रहा धरना रविवार को भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने यहां बैठक कर आगे की रणनीति बनाई। प्रदर्शनकारियों कहा कि सरकार धरना को समाप्त कराने के लिए तमाम साजिश रच रही है, लेकिन उसे सफल नहीं होने दिया जाएगा। तीनों कानूनों के वापस होने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनने तक धरना जारी रहेगा। वो लोग उससे पहले किसी तरह से समझौता नहीं करेंगे, आंदोलन भी खत्म नहीं होगा।

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कोरोना और गर्मी को ध्यान में रखते हुए करेंगे तैयारी

संयुक्त किसान मोर्चा गाजीपुर बार्डर के प्रवक्ता जगतार सिंह बाजवा ने कहा कि बैठक में तय किया गया है कि धरने में कोरोना और गर्मी को देखते हुए खाने-पीने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि किसी को कोई समस्या न हो। वहीं, उन्होंने कहा कि धरना को बदनाम करने की नीयत से काम किए जा रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने यहां एक तरफ से बैरिकेडिंग को हटा दिया है मगर बाकी चीजें सामान्य नहीं कर रही है। इस बैठक में राजवीर सिंह जदौन, डीपी सिंह, बलजिंदर मान, आशीष मित्तल आदि मौजूद थे।


बंगाल में बीजेपी हारी तो किसानों का बदला सुर

बंगाल चुनाव में भाजपा की हार के बाद किसानों के तेवर भी बदल गए हैं। चुनाव में भाजपा की हार के बाद टिकैत ने यह साफ कर दिया है कि सरकार या तो कानून वापस ले लें या फिर किसान अपना संघर्ष और तेज करेंगे। राकेश टिकैत ने अपने एक और ट्वीट में भाजपा की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब सत्ता अहंकारी, निरंकुश और पूंजीपतियों की वफादार हो जाये, तो जनता के पास वोट की चोट की ताकत होती है। इससे वह सत्ता को सबक सिखा सकती है। बता दें कि राकेश टिकैत नए कृषि कानूनों को वापस करने की मांग पर दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर कई महीनों से जमे हुए हैं। वह इसे किसानों के लिए काला कानून बता चुके हैं।

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