सिखों की धार्मिक संस्था को राजनीति हस्तक्षेप से बाहर रखा जाएगाः कालका
Delhi News कालका शिरोमणि अकाली दल (शिअद बादल) के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। शिअद बादल के टिकट पर उन्होंने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) का चुनाव लड़कर जीत हासिल की। पार्टी ने उन्हें डीएसजीएमसी का अध्यक्ष बनाया।

नई दिल्ली [संतोष कुमार सिंह]। शिरोमणि अकाली दल दिल्ली स्टेट का चुनाव चिह्न टोकरी होगा। तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में पार्टी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका व अन्य नेताओं ने पार्टी के चिह्न की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह पार्टी गैर राजनीतिक है। सिखों के हित के लिए काम करेगी।
कालका शिरोमणि अकाली दल (शिअद बादल) के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। शिअद बादल के टिकट पर उन्होंने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) का चुनाव लड़कर जीत हासिल की। पार्टी ने उन्हें डीएसजीएमसी का अध्यक्ष बनाया। उसके बाद कालका ने कमेटी को राजनीति से अलग रखने की बात कहकर शिअद बादल के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। कुछ समय उन्होंने बाद नई पार्टी बनाने की घोषणा कर दी। शिअद बादल के टिकट पर कमेटी पहुंचे अधिकांश सदस्य भी नई पार्टी में शामिल हो गए।
कालका ने कहा कि पार्टी का उद्देश्य सिखों की धार्मिक संस्था को राजनीतिक हस्तक्षेप से अलग रखना है। इसके पदाधिकारी राजनीतिक चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि शिअद बादल नेतृत्व ने शिरोमणि अकाली दल दिल्ली के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना और जग आसरा गुरु ओट के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके के साथ मिलकर कमेटी बनाने का आदेश दिया था।
इन दोनों नेताओं पर गुरु के गोलक के दुरुपयोग का आरोप है। इसे मंजूर नहीं किया जा सकता था। 1984 के सिख विरोधी दंगे के आरोपितों को सम्मानित करने वालों के साथ हाथ नहीं मिलाया जा सकता था। कमेटी के सदस्यों ने इसका विरोध किया था। इस कारण नई पार्टी बनाने का फैसला किया गया जिससे कि पंथक मामलों पर ध्यान केंद्रित किया जा सके। नशा, धर्म परिवर्तन चिंता की बात है।
महासचिव जगदीप सिंह काहलों ने कहा कि पार्टी के सदस्य सिखों के हित में काम कर रहे हैं। डीएसजीएमसी के पूर्व अध्यक्ष व भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा के नेतृत्व में कोरोना काल में सराहनीय योगदान दिया है। जब भी जरूरत होगी उनकी सेवा ली जाएगी। पार्टी को मजबूत करने और पंथ की सेवा में सराहनीय योगदान देने वालों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर कई सिख नेता मौजूद थे।
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