Delhi News: छात्रों की भूख हड़ताल के बीच JNU प्रशासन ने उठाया कड़ा कदम, पूरी हुई ये बड़ी मांग
दिल्ली के जेएनयू में छात्र संघ की भूख हड़ताल के बीच प्रशासन ने पीएचडी छात्रों के लिए छात्रावास सुविधा विस्तार और दिसंबर 2025 में पीएचडी दाखिला कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। छात्रों की कुछ मांगों को प्रशासन ने स्वीकार कर लिया है जिनमें छात्रावास विस्तार और साल में दो बार पीएचडी दाखिला प्रक्रिया शामिल है। छात्र संघ बाकी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने पर अड़ा है।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में छात्र संघ की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के बीच प्रशासन ने बड़ा कदम उठाते हुए पीएचडी छात्रों के लिए छात्रावास सुविधा विस्तार और दिसंबर 2025 में पीएचडी दाखिला कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है।
यह कदम छात्र संघ और प्रशासन के बीच चल रहे तनाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पिछले महीने 26 जून से छात्र संघ अध्यक्ष नीतीश कुमार सहित कई छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। छात्रों की मांगों में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए पीएचडी प्रवेश में प्रवेश परीक्षा की बहाली, वाइवा अंकों की प्राथमिकता कम करना, छात्रावास खाली करने के नोटिस वापस लेना, थीसिस जमा होने तक छात्रावास सुविधा, प्राक्टोरियल जांच बंद करना, जून 2025 के नेट उम्मीदवारों के साथ भेदभाव न करना और मासिक छात्रवृत्ति (एमसीएम) को बढ़ाकर 5,000 रुपये करना शामिल है।
प्रशासन ने छात्रावास सुविधा और पीएचडी दाखिला प्रक्रिया से संबंधित कुछ मांगों को स्वीकार कर लिया है। नई सूचना के अनुसार, पीएचडी थीसिस जमा करने वाले छात्र अब छात्रावास विस्तार के लिए इंटर-हाल एडमिनिस्ट्रेशन (आइएचए) को अनुरोध भेज सकते हैं, जिस पर स्कूल के पर्यवेक्षक, चेयरमैन और डीन के हस्ताक्षर आवश्यक होंगे। प्रशासन ने हर मामले को मानवीय आधार पर विचार करने का आश्वासन दिया है।
इसके अलावा, कोरोना के बाद पहली बार साल में दो बार पीएचडी दाखिला प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया है, जिससे जून 2025 के नेट उम्मीदवारों को भी आवेदन का अवसर मिलेगा। छात्र संघ अध्यक्ष नीतीश कुमार ने इसे आंशिक जीत करार देते हुए कहा, "प्रशासन शुरू में हमारी बात सुनने को तैयार नहीं था, लेकिन भूख हड़ताल के दबाव में उसे झुकना पड़ा। छुट्टियों के दौरान भी छात्रावास विस्तार की सूचना जारी की गई। हमारी मांग है कि कोई भी छात्र पढ़ाई के दौरान छात्रावास खाली करने के लिए मजबूर न हो। यह केवल शुरुआत है, हम बाकी मांगों को भी पूरा करवाने के लिए दबाव बनाए रखेंगे।
हालांकि, प्रशासन के इस कदम से गतिरोध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। छात्र संघ ने बाकी मांगों, खासकर एमसीएम बढ़ोतरी और प्राक्टोरियल जांच बंद करने पर जोर देते हुए आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। इस बीच, जेएनयू प्रशासन का यह कदम छात्रों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है।
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