जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। ईशा फाउंडेशन के संस्थापक व आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने कहा कि अदृश्य कोरोना संक्रमण के खिलाफ हमारी यह लड़ाई जंग की स्थिति जैसी है। इसमें घबराहट, हताशा, भय, व क्रोध जैसी चीजें हमारी मदद करने वाली नहीं है। यह एक-दूसरे पर अंगुली उठाने का समय नहीं है। यह एक साथ मिलकर खड़े होने का समय है-एक राष्ट्र के रूप में ही नहीं, बल्कि पूरे मानव समाज के रूप में। उन्होंने यह बातें देशभर के आध्यात्मिक, धार्मिक गुरु-संस्थाएं, सामाजिक व उद्यमी संस्थाओं समेत समाज के अन्य समुदाय से मिलकर कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में समाज व सरकार की मदद के लिए बनी कोविड रिस्पांस टीम (सीआरटी) द्वारा देश के लोगों में आत्मविश्वास भरने तथा इस लड़ाई में उन्हें मानसिक रूप से संबल बनाने के लिए शुरू किए गए पांच दिवसीय व्याख्यानमाला के पहले दिन शुभारंभ करते हुए कहीं।

उन्होंने कहा कि यह आवश्यक है कि हम जो भी काम कर रहे हैं, उन्हें करना जारी रखें। सारी गतिविधियां एकदम बंद करने से राष्ट्र या दुनिया को इस चुनौती का समाधान नहीं मिलेगा क्योंकि इससे हम पर और ज्यादा प्रतिकूल असर पड़ेगा। इसीलिए यह महत्वपूर्ण है कि हम क्या काम कर रहे हैं, बिना लोगों के नजदीक जाए व संक्रमित हुए किस प्रकार हम अपने काम को जारी रखते हैं, यह करना हमारा मूलभूत दायित्व है।

पांच दिवसीय व्याख्यानमाला का हुआ शुभारंभ

इस व्याख्यान श्रृंखला में आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर, देश के प्रसिद्ध उद्योगपति अजीम प्रेमजी, शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती, पद्म विभूषण सोनल मानसिंह, जैन मुनि आचार्य विद्यासागर, व महंत संत ज्ञानदेव सिंह संबोधित करेंगे। व्याख्यान श्रृंखला का समापन 15 मई को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के उद्बोधन के साथ होगा।

मंगलवार को इसका शुभारंभ सद्गुरु जग्गी वासुदेव और जैन मुनिश्री प्रमाणसागर के उद्बोधन से आरंभ हुआ। दोनों आध्यात्मिक गुरुओं ने भारतीय समाज से आह्वान किया कि कोविड -19 के खिलाफ लड़ाई जीतने के लिए समाज के सभी सदस्य मजबूत संकल्प लें व घबराहट, डर, हताशा और क्रोध से बचें। साथ ही विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय समाज में वर्तमान चुनौती सहित किसी भी चुनौती का सामना कर उस पर विजय प्राप्त करने की क्षमता है। इस बात पर बल दिया कि वर्तमान समय में सबसे महत्वपूर्ण है - सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखना।

अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटने का समय- सद्गुरु जग्गी वासुदेव

सद्गुरू ने कहा कि यह समय बहुत गहरे जाकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटने का है जो मानव के भीतर जाकर उसके स्वस्थ होने पर बल देती हैं। कम से कम भारत को यह उदाहरण विश्व के सामने स्थापित करना चाहिए। चाहे हमारे जीवन में कुछ भी हो जाए...हम शांत रहेंगे। कैसी भी परिस्थिति हो जाए, हम उससे पार पाने में सफल होंगे। हमें विश्व के सामने इसे स्थापित करने की आवश्यकता है। कई संदर्भों में विश्व इस समय भारत की ओर आशाभरी निगाहों से देख रहा है।

मन को मजबूत बनाओ, घबराइए मत। बीमारी आई है, तो ये जाएगी भी: जैन मुनिश्री प्रमाण सागर

जैन मुनिश्री प्रमाण सागर ने कहा कि निश्चित ये बहुत त्रासदीपूर्ण काल है। लेकिन ऐसे समय में एक संदेश मैं लोगों को देना चाहता हूं। सबसे पहले उन लोगों को जो आज इस महामारी के शिकार हुए हैं, जो आज अपनी चिकित्सा ले रहे हैं, जो अस्पतालों में हैं। मैं, उन सबसे कहना चाहता हूं कि मन को मजबूत बनाओ, घबराइए मत। बीमारी आई है, तो ये जाएगी भी। ये बीमारी आई है इसका मतलब ये नहीं कि बीमारी आई है तो मौत ही आ गई। मन को अच्छा रखिए। यदि आपका मन मजबूत होगा तो आप इस बीमारी को चुटकियों में हरा सकते हैं। उन्होंने कहा, "अपने भीतर आध्यात्मिक दृष्टि रखें कि ये बीमारी तन को है, मन को नहीं। तन की बीमारी के सौ इलाज हैं, मन की बीमारी का कोई इलाज नहीं। इसलिए मैं सबसे कहना चाहूता हूं, इस तन की बीमारी को मन पर हावी मत होने दें।'

"मन का जो मजबूत उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता'

उन्होंने कहा किमन जिसका मजबूत होता है, उसका कोई कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता। मैं मानता हूं कि अमर कोई नहीं है, लेकिन हमें बेमौत नहीं मरना। लोगों को थोड़ा सा कोविड पॉजिटिव आता है तो लोगों के मन में खौफ आ जाता है कि अब तो गए। और मरीज के साथ-साथ उनके परिजन भी अधीर हो जाते हैं। वो भी बहुत घबरा जाते हैं और इसी घबराहट में मामला बिगड़ जाता है। पेशेंट के साथ उनके परिजन को भी थोड़ा धैर्य रखना चाहिए। ठीक है, बीमारी आई है चली जाएगी। आप हिसाब लगा लीजिए, हमारे यहां इतने सारे लोग संक्रमित हो रहे हैं, पर ज्यादातर तो लोग ठीक होकर ही जा रहे हैं। मृत्यु की दर तो लगभग डेढ़ फीसद ही है ना। ठीक है, ये दूसरी लहर थोड़ा भयानक है, इसलिए सावधानी पूरी रखिए, सतर्कता रखिए।

यह व्याख्यान श्रृंखला कोविड रिस्पांस टीम (CRT) द्वारा आयोजित की गई है, जिसमें धार्मिक, आध्यात्मिक, व्यावसायिक, परोपकारी और सामाजिक संगठनों सहित समाज के सभी वर्गों व क्षेत्रों के प्रतिनिधि जुड़े हुए हैं। इस श्रृंखला का आयोजन भारतीय समाज के सामने आई कोविड-19 की चुनौती के संदर्भ में सकारात्मक वातावरण बनाने के उद्देश्य से किया रहा है।

इस श्रृंखला के अंतर्गत 11 मई से 15 मई तक प्रति दिन 4:30 बजे 100 से अधिक मीडिया प्लेटफार्मों पर विभिन्न गणमान्य लोगों के उद्बोधन प्रसारित किए जा रहे हैं। 12 मई को आध्यात्मिक गुरु और द आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर, प्रसिद्ध समाजसेवी अजीम प्रेमजी और जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता पद्मश्री निवेदिता भिड़े विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी, इस व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत समाज को संबोधित करेंगे।

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