नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली मेट्रो रेल निगम (Delhi Metro Rail Corporation) द्वारा संचालित दिल्ली मेट्रो में किराया दोगुना होने से यात्री जहां पहले से ही परेशान हैं, वहीं अब उन्हें मेट्रो स्टेशन पर उतरने के बाद घर व दफ्तर पहुंचने के लिए भी जेब ढीली करनी पड़ेगी। दरअसल, दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) ने लास्ट माइल कनेक्टिविटी की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएं तैयार की हैं।

ई-रिक्शा व इलेक्ट्रिकल मेट्रो फीडर बस जैसी लास्ट माइल कनेक्टिविटी की किफायती सुविधाएं तो अब तक उपलब्ध नहीं हो पाई, लेकिन मेट्रो स्टेशनों से गंतव्य तक जाने के लिए किराये पर कैब उपलब्ध कराने की योजना है। इसके लिए डीएमआरसी ने कैब संचालक कंपनी से करार किया है। लास्ट माइल कनेक्टिविटी की यह योजना यात्रियों की जेब पर भारी पड़ सकती है।

लोगों को प्रतिदिन भारी भरकम रकम मेट्रो व कैब के किराये पर खर्च करनी पड़ सकती है। जिन इलाकों में मेट्रो की सुविधा एक किलोमीटर से अधिक दूरी पर है, वहां के यात्रियों को स्टेशन तक पहुंचने में थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है, क्योंकि मौजूदा समय में डीएमआरसी सिर्फ 174 मेट्रो फीडर बसों का परिचालन कर रहा है। इन मेट्रो फीडर बसों का किराया 5-10 रुपये है। फीडर बसों की संख्या कम होने की वजह से डीएमआरसी ने लास्ट माइल कनेक्टिविटी की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए उबर कैब से करार किया है, जिसे 210 स्टेशनों पर जगह उपलब्ध कराई गई है। इन स्टेशनों पर कैब संचालक कंपनी करीब 400 जगहों पर अपना कियोश्क लगाएगी। जहां यात्री कैब बुक करा सकेंगे।

डीएमआरसी मेट्रो स्टेशनों पर कैब की पार्किंग के लिए जगह भी उपलब्ध कराएगा। हालांकि कैब की सुविधा लेना या न लेना यात्रियों की इच्छा पर है लेकिन इस योजना का एक मकसद यह भी है कि मेट्रो स्टेशनों के पास ऑटो व ग्रामीण सेवा की आवाजाही कम की जाए।

मेट्रो फीडर बसें पर्याप्त संख्या में नहीं हैं, ई-रिक्शा योजना भी परवान नहीं चढ़ीं ऐसे में यदि मेट्रो स्टेशनों के पास ऑटो व ग्रामीण सेवा को खड़ी होने की जगह उपलब्ध नहीं कराई जाएगी तो यात्रियों को मजबूरी में कैब का सहारा लेना पड़ेगा। ऐसे में तीन से चार किलोमीटर के सफर के लिए भी यात्रियों को व्यस्त समय में 100-110 रुपया किराया कैब को भुगतान करना पड़ सकता है।

यह भी तब जबकि पहले हुए सर्वे में यह बात सामने आ चुकी है कि मेट्रो में 15000 से 25,000 रुपये कमाने वाले लोग ही अधिक सफर करते हैं। दिल्ली व एनसीआर के शहरों के बीच आवागमन के लिए यात्री मेट्रो में एक तरफ से 60 रुपये व दोनों तरफ से 120 रुपये किराया भुगतान करने को मजबूर हैं। यदि मेट्रो स्टेशन पर उतरने के बाद मजबूरी में कैब लेना पड़े तो यात्रियों का बजट बिगड़ना तय है।

यात्रियों को किराये में नहीं मिलेगी कोई छूट

डीएमआरसी का कहना है कि मेट्रो स्टेशनों पर एप आधारित कैब की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए टेंडर जारी किया गया था। इसके तहत तीन साल के लिए लीज पर कैब संचालक कंपनी को स्टेशनों पर जगह उपलब्ध कराई जा रही है। इससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल पाएगी। हालांकि कियोस्क से कैब बुक करने पर मेट्रो के यात्रियों को कोई छूट नहीं मिलेगी। मेट्रो के अधिकारी यह भी कह रहे हैं कि इससे ऑटो वालों की मनमानी रुकेगी।

डीएमआरसी ने 427 मेट्रो फीडर बस खरीदने की योजना बनाई है, जो करीब दो साल से अधर में लटकी पड़ी है। बजट के अभाव में एक बार टेंडर रद भी किया जा चुका है। अब डीएमआरसी ने नए सिरे से 100 इलेक्ट्रिकल फीडर बसें खरीदने की प्रक्रिया शुरू की है।

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Posted By: JP Yadav

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