AIIMS Delhi: एम्स में संक्रमण दर कोरोना से पहले की तुलना में ज्यादा, मृत्यु दर हुई कम
AIIMS Delhi News एम्स की रिपोर्ट के अनुसार कोरोना से पहले अस्पताल में संक्रमण दर 5.8 प्रतिशत थी और अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की मृत्यु दर 1.7 प्रतिशत थी। कोरोना के दौर में संक्रमण दर बढ़कर 8.9 प्रतिशत और मृत्यु दर बढ़कर तीन प्रतिशत पहुंच गई थी। यह बात एम्स की वर्ष 2022-23 की रिपोर्ट में सामने आई है।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। एम्स में मरीजों की संख्या कोरोना से पहले के बराबर हो गई है। दो लाख 48 हजार से अधिक रिकॉर्ड सर्जरी भी हुई है। इस बीच अस्पताल आधारित संक्रमण दर भी कोरोना के दौर के तुलना में कम हुई है, लेकिन कोरोना से पहले की तुलना में एम्स में संक्रमण दर अब भी अधिक है।
मरीजों की मृत्यु दर कम करने में मिली कामयाब
यह बात एम्स की वर्ष 2022-23 की रिपोर्ट में सामने आई है। इसके आंकड़े एम्स ने अपने स्थापना दिवस के मद्देनजर संस्थान में प्रदर्शित किए हैं, लेकिन अच्छी बात यह है कि अस्पताल आधारित संक्रमण दर अधिक होने के बावजूद एम्स अस्पताल में भर्ती मरीजों की मृत्यु दर कम करने में कामयाब रहा है। यही वजह है कि एम्स में मृत्यु दर छह वर्षों में सबसे कम रही।
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एम्स की रिपोर्ट के अनुसार कोरोना से पहले अस्पताल में संक्रमण दर 5.8 प्रतिशत थी और अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की मृत्यु दर 1.7 प्रतिशत थी। कोरोना के दौर में संक्रमण दर बढ़कर 8.9 प्रतिशत और मृत्यु दर बढ़कर तीन प्रतिशत पहुंच गई थी।
क्योंकि कोरोना के दौर में अस्पताल में दूसरी बीमारियों से भर्ती बहुत मरीज कोरोना से भी संक्रमित हो रहे थे। वर्ष 2021-22 में भी एम्स में संक्रमण दर 8.3 प्रतिशत और मृत्यु दर दो प्रतिशत थी। कोरोना के बाद एम्स में स्वास्थ्य सुविधाएं सामान्य होने पर ओपीडी, आइपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ी।
एम्स में पिछले छह वर्षों में संक्रमण और मृत्यु दर (प्रतिशत में)
वर्ष | संक्रमण दर | मौतें |
2022-23 | 7.1 | 1.6 |
2021–22 | 8.3 | 2.0 |
2020–21 | 8.9 | 3.0 |
2019–20 | 1.7 | 5.6 |
2018–19 | 5.8 | 1.7 |
2017–18 | 6.0 | 1.8 |
वर्ष 2022-23 में ओपीडी में 42.55 लाख से अधिक मरीज देखे गए। दो लाख 80 हजार 770 मरीज भर्ती हुए और दो लाख 48 हजार 826 मरीजों की सर्जरी और प्रोसीजर हुए।
इस बीच संक्रमण दर संक्रमण दर 7.1 प्रतिशत रही, जो कोरोना से पहले की तुलना में अधिक है। वहीं मृत्यु दर 1.6 प्रतिशत दर्ज की गई, जो छह वर्षों में सबसे कम है। इसलिए संक्रमण दर अधिक होने के बावजूद मरीजों की मौतें कम हुई।
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