नई दिल्ली, जेएनएन। भारतीय महिला रग्बी टीम की खिलाड़ियों ने अपने हौसले से असंभव को भी संभव करते हुए फिलिपींस की राजधानी मनीला में एशिया कप में कास्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। इस जीत में ओडिशा रहने वाली आदिवासी लड़कियों ने अहम भूमिका निभाई थी। 

आदिवासी खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने की कड़ी में दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशनल क्लब में कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (किस) के संस्थापक और लोकसभा सांसद प्रो. अच्युत सामंत ने सम्मानित किया। 

सम्मानित होने वाली खिलाड़ियों में सुमित्र नायक, हुपी मांझी, रजनी साबर, मीरारानी हेम्ब्रम और पारबती किस्कू हैं, जो छात्रावास में रहते हुए पढ़ाई भी कर रही हैं।  इन सभी को रग्बी का दमदार खिलाड़ी बनाने के लिए इनके संस्थान के कोच ने भी काफी मेहनत की है।

एशिया कप में रग्बी टीम द्वारा कांस्य जीतने वाली खिलाड़ियों में शामिल सुमित्र नायक की उपलब्धि इस मायने में खास रही कि उन्होंने दूसरे हाफ में पेनाल्टी को जीत में बदल दिया था। 

रग्बी में परचम लहराती ये आदिवासी लड़कियां
महिला खिलाड़ियों की टीम को सम्मानित करते हुए ओडिसा की कंधमाल लोकसभा सीट से सांसद अच्युत सामंत ने कहा कि आदिवासी बच्चों में जीत का जबरदस्त जज्बा है। जरूरत है कि ऐसे होनहार खिलाड़ियों को सही तरीके से तराशा जाए। 

15 सदस्यों की टीम में से सात खिलाड़ी ओडिशा से हैं। ओडिशा की रहने वालीं संगीता बेरा ने तो इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए बच्चों को घर पर ही छोड़ दिया था, लेकिन उनका यह बलिदान बेकार नहीं गया और टीम ने इतिहास रच दिया। 

गौरतलब है कि एशियाई रग्बी महिला चैंपियनशिप डिवीजन एक में सिंगापुर के ख़िलाफ़ भारतीय महिलाओं ने ज़ोरदार खेल दिखाया और काफी करीबी मुकाबले में सिंगापुर जैसी मजबूत टीम को 21-19 से हराया। खेल की शुरुआत से ही भारतीय लड़कियों ने उम्दा प्रदर्शन करना शुरू कर दिया था। 

जानिए कौन हैं अच्युत सामंत
अविवाहित डॉ अच्युत सामंत ओडिशा के प्रसिद्ध समाजसेवी व शिक्षाशास्त्री हैं। वह कलिंग प्रौद्योगिकी संस्थान (कीट), कलिंग औद्योगिक प्रौद्योगिकी संस्थान (किस) व कलिंग समाज विज्ञान संस्थान के संस्थापक हैं। इन संस्थानों में आदिवासी छात्र-छात्राओं को मुफ्त शिक्षा दी जाती है। 

आदिवासी बच्चों को मुफ्त शिक्षा, खाना, किताबें, ड्रेस मुहैया कराने वाले डा. अच्युत सामंत ओडिशा की कंधमाल लोकसभा सीट से सांसद भी हैं। अच्युत सामंत खुुद को सबसे गरीब सांसद मानते हैं। इस इस वक्त उनके पास 3.40 लाख रुपये बैंक बैलेंस है। 

सामंत कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (किस) से जुड़े करीब 27 हजार गरीब आदिवासी बच्चों को केजी से पीजी तक की मुफ्त शिक्षा, छात्रावास और भोजन मुहैया करा रहे हैं। 

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Posted By: JP Yadav

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