Delhi Chunav: 26 साल से सत्ता से बाहर बीजेपी, दिल्ली में सबसे बड़ी चुनौती क्या? रिपोर्ट से समझिए पूरा गणित
दिल्ली में भाजपा के लिए सत्ता हासिल करना आसान नहीं है। पिछले आठ विधानसभा चुनावों और तीन मेट्रोपॉलिटन काउंसिल चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि 47 प्रतिशत से अधिक मत पाने वाली पार्टी ही बहुमत हासिल कर पाई है। भाजपा को दिल्ली में सत्ता हासिल करने के लिए अपना वोट प्रतिशत बढ़ाना होगा। आप ने पिछले दो चुनावों में प्रचंड बहुमत से जीत हासिल की है।

रणविजय सिंह, नई दिल्ली। प्रचंड बहुमत के साथ राष्ट्रीय राजधानी की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी (AAP) का आकलन जनता पिछले विधानसभा चुनाव के वादों व 10 वर्ष में किए गए कार्यों के आधार पर करेगी। इसलिए आप के सामने इस बार चुनौतियां पहले से ज्यादा है।
दिल्ली के किले की राह आसान नहीं
दूसरी तरफ एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी रही भाजपा के लिए भी दिल्ली के किले की राह आसान नहीं है। पिछले आठ दिल्ली विधानसभा चुनाव व तीन मेट्रोपॉलिटन काउंसिल चुनाव के आंकड़े इस बात की कहानी बयान कर रहे हैं। भाजपा के लिए दिल्ली की सत्ता में आमने-सामने की लड़ाई में वही दल काबिज हुआ, जिसने 47 प्रतिशत से अधिक मत पाकर बहुमत हासिल किया हो।
सिर्फ दो विधानसभा चुनाव इसके अपवाद रहे, लेकिन भाजपा उस आंकड़े तक विधानसभा चुनाव में कभी नहीं पहुंच पाई। लिहाजा, दिल्ली की सत्ता से 26 वर्षों का बनवास दूर करने के लिए भाजपा को मत प्रतिशत बढ़ाना होगा।
जीतकर बड़े दल के रूप में उभरी थी आप
पिछले आठ विधानसभा चुनाव में चार बार कांग्रेस, एक बार भाजपा व पिछले दो चुनावों में आम आदमी पार्टी (आप) को प्रचंड बहुमत मिला। वर्ष 2013 के चुनाव में किसी एक दल को बहुमत नहीं मिल पाया था। भाजपा 31 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। पहली बार चुनाव में उतरी आप ने 28 सीटें जीतकर कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई, लेकिन सरकार ज्यादा दिन नहीं टिकी।
वहीं, पिछले दो चुनावों में आप ने 54.34 प्रतिशत व 53.57 प्रतिशत वोट हासिल कर एकतरफा चुनाव जीता। कांग्रेस ने भी एक बार छोड़कर तीन बार 47 प्रतिशत से अधिक मत पाए, लेकिन भाजपा को अब तक 42.82 प्रतिशत से अधिक वोट नहीं मिले।
वर्ष 1993 में भाजपा 42.82 और वर्ष 2008 में कांग्रेस 40.31 प्रतिशत वोट लेकर सरकार बनाने में कामयाब रही, लेकिन तब दोनों चुनावों में किसी तीसरे दल ने भी अच्छा खासा वोट हासिल किया। वर्ष 1993 में कांग्रेस को 34.48 प्रतिशत वोट मिलने के अलावा जनता दल ने 12.65 प्रतिशत वोट लेकर कांग्रेस के वोट में जबरदस्त सेंध लगाई थी। इसका फायदा भाजपा को मिला।
भाजपा का मत प्रतिशत कुछ खास नहीं बढ़ पाया
बता दें कि वर्ष 2008 के चुनाव में बीएसपी को 14.05 प्रतिशत वोट मिले थे। इससे पिछले चुनाव के मुकाबले कांग्रेस का मत 7.82 प्रतिशत कम तो हुआ लेकिन भाजपा का मत प्रतिशत कुछ खास नहीं बढ़ पाया। इसलिए 40.31 प्रतिशत वोट पाकर भी कांग्रेस सत्ता में बहुमत के साथ वापसी करने में कामयाब रही थी।
वर्ष 1951 के चुनाव के बाद दिल्ली विधानसभा भंग होने और 1991 में 69वें संविधान संशोधन के बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम लागू होने से वर्ष 1993 में विधानसभा के गठन से पहले दिल्ली मेट्रोपालिटन काउंसिल के तीन चुनाव भी हुए थे। उसमें भी 47 प्रतिशत से अधिक वोट पाने वाले दलों को बहुमत मिला था।
26 वर्षों से दिल्ली की सत्ता से बाहर है भाजपा
भाजपा 26 वर्षों से दिल्ली की सत्ता से बाहर है और हर चुनाव में एक प्रबल दावेदार होने के बावजूद वर्ष 1993 के चुनाव के बाद भाजपा 40 प्रतिशत मत के आंकड़े तक भी नहीं पहुंच पाई है। इस बार चुनावी दंगल में आप को पटखनी देने के लिए भाजपा को ज्यादा मेहनत करना पड़ेगा।
दिल्ली में पिछले विधानसभा चुनावों में विजेता व प्रतिद्वंदी दल का मत प्रतिशत व सीटें
चुनाव- विजेता- प्रतिद्वंद्वी दल
वर्ष- दल- सीटें- मत प्रतिशत-- दल- सीटें- मत प्रतिशत
1951- कांग्रेस- 39- 52.09-- बीजेएस- 5- 21.89
1993- भाजपा- 49- 42.82-- कांग्रेस- 14- 34.48
1998- कांग्रेस- 52- 47.76-- भाजपा- 15- 34.02
2003- कांग्रेस- 47- 48.13-- भाजपा- 20- 35.22
2008- कांग्रेस- 43- 40.31-- भाजपा- 23- 36.34
2013- भाजपा- 31- 33.07-- आप- 28- 29.49
2015- आप- 67- 54.34-- भाजपा- 03- 32.19
2020- आप- 62- 53.57-- भाजपा- 08- 38.51
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