नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। नजफगढ़ का ऐतिहासिक दिल्ली गेट का नाम वैद्य किशन लाल द्वार है। बहुत ही कम लोगों को यह पता है कि महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के आह्वान पर वैद्य किशन लाल ने न सिर्फ देश की आजादी में योगदान दिया, बल्कि आजादी के बाद भी वे गांधी के बताए रास्ते पर आजीवन चलते रहे।

नजफगढ़ से जुड़ा है किशन लाल का नाता

पहले सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) और फिर भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) में उन्होंने सक्रिय भागीदारी निभाई। नजफगढ़ के लोगों को इस बात का गर्व है कि वैद्य किशन लाल का नाता यहां से है। नजफगढ़ के हरेंद्र सिंघल बताते हैं कि भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान दिल्ली की कमान वैद्य किशन लाल के हाथ में थी।

जब राशन कार्ड बनाना बड़ा दुरूह कार्य समझा जाता था, तब जिसके कागजात को किशन लाल सत्यापित कर देते थे, उसके कागजात को प्रशासन सही मान लेता था और उसका राशन कार्ड बन जाता था। उनकी हर बात पर नजफगढ़ के लोग खड़े होने के लिए तैयार रहते थे। सामाजिक कार्यो में वे बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते थे।

सिद्धांतों को लेकर कभी नहीं किया समझौता

सिद्धांतों को लेकर उन्होंने कभी समझौता नहीं किया। आजादी के बाद जब गांधी जी ने कहा कि अब कांग्रेस को समाप्त कर दिया जाना चाहिए, उनकी इस बात पर उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।

एक बार उन्हें दिल्ली के मुख्यमंत्री के पद का प्रस्ताव दिया गया, लेकिन उन्होंने इसे यह कहते हुए स्वीकार नहीं किया कि आजादी के लक्ष्य की प्राप्ति के बाद अब राजनीति से कोई वास्ता नहीं है।

इसके बाद वे हमेशा गांधी के बताए रास्ते पर चलते रहे। स्वतंत्रता के बाद गांधीजी के रास्ते पर चलते हुए उन्होंने बिनोबा भावे के नेतृत्व में चल रहे भूदान आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई। दिल्ली में भूदान आंदोलन को उन्होंने गति प्रदान की।

Edited By: Abhishek Tiwari