नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। 22 जुलाई 1947 को तिरंगे झंडे को राष्ट्रीय ध्वज घोषित किया गया था। संविधान सभा में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इसकी घोषणा की थी। तिरंगा झंडा...हर भारतीय की आन, बान और शान है। 26 जनवरी 2002 को भारत के प्रत्येक नागरिक को तिरंगा झंडा शान के साथ फहराने की इजाजत मिली। भारत को एकता के सूत्र में पिराेते तिरंगे झंडे के कपड़े की गुणवत्ता सुधारने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-दिल्ली आइआइटी दिल्ली) ने फ्लैग फाउंडेशन आफ इंडिया संग करार किया है। जिसके तहत संयुक्त शोध किए जाएंगे।

मौसमी प्रभावों से बचाना

आइआइटी विज्ञानियों ने कहा कि देश में जलवायु और भौगोलिक भिन्नताएं हैं। इंजीनियरिंग फ्रैब्रिक डिजाइन करना बड़ी चुनौती है। ऐसे में आइआइटी शोध के जरिए झंडे के लिए रेशे को इस तरह से चुना और डिजाइन किया जाएगा ताकि वह कठोर जलवायु परिस्थितियों में भी लंबे समय तक टिक सके और बहुत भारी भी नहीं हो।

आइआइटी दिल्ली के टेक्सटाइल एंड फाइबर इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी का जवाब

यह समय की मांग है कि उचित मानकीकरण और विषय की जानकारी या फैब्रिक प्रौद्योगिकी की कुशलता और ध्वज में इस्तेमाल होने वाले रेशे की गुणवत्ता में सुधार के लिए उत्पादकों की मदद की जाए।

प्रो विपिन कुमार, टेक्सटाइल एंड फाइबर इंजीनियरिंग विभाग, आइआइटी दिल्ली

फ्लैग फाउंडेशन आफ इंडिया

अच्छी गुणवत्ता का झंडा प्राप्त करना हमारे लिए हमेशा चुनौती भरा रहा है। उचित प्रौद्योगिकी विकसित करने को लेकर आइआइटीटी दिल्ली के विशेषज्ञों के साथ काम करना गौरवान्वित करने वाला पल है।

मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अशिम कोहली, सीईओ, फ्लैग फाउंडेशन आफ इंडिया

राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े तथ्य

-22 जुलाई 1947 को तिरंगे झंडे को राष्ट्रीय ध्वज घोषित किया गया।

-26 जनवरी 2002 को आम नागरिकों को तिरंगा फहराने का अधिकार मिला।

-अगले साल 15 अगस्त 2022 को देश की आजादी के 75 साल पूरा होंगे। इस लिहाज से समझौता महत्वपूर्ण।