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    नहर से मिली कार में निकला कंकाल, चार साल पहले हुआ था लापता; घरवालों ने कपड़ों से की पहचान

    Updated: Sun, 14 Jul 2024 12:42 AM (IST)

    Delhi Crime News सितंबर 2020 में गायब हुआ विनोद चार साल बाद मिला। परिजनों को तलाश थी कि वे जिंदा लौटेंगे लेकिन उनका कंकाल मिला। मूनक नहर में जब पानी कम हुआ तो कार दिखी कार में ही उनका कंकाल था। परिजनों ने कपड़ों से पहचान की कि यह विनोद का शव है। पुलिस अब घरवालों का डीएनए टेस्ट कराएगी।

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    खेड़ा के पास मूनक नहर से निकाली गई कार।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। मूनक नहर में कार में मिला कंकाल बुध विहार रहने वाले विनोद कुमार का ही था। विनोद कुमार लगभग चार साल पहले कोरोना काल के दौरान अपनी कार समेत लापता हो गए थे। विनोद कुमार की पहचान कपड़ों के आधार पर उनके स्वजन ने की।

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    इसके बाद पुलिस ने पोस्टमॉर्टम कराकर शव स्वजन को सौंप दिया है। पुलिस का कहना है कि मृतक के स्वजन की संतुष्टि के लिए डीएनए टेस्ट भी कराया जाएगा।

    कार में था नर कंकाल

    खेड़ा गांव के पास मूनक नहर में बृहस्पतिवार को स्विफ्ट डिजायर कार मिली थी, जांच के दौरान कार में नर कंकाल भी मिला। कार के पंजीकरण नंबर के आधार पर पुलिस स्वजन तक पहुंची। यह कार बुध विहार निवासी विनोद कुमार के नाम पर पंजीकृत पाई गई।

    2020 से गायब था विनोद

    स्वजन ने बताया कि विनोद कुमार कार के साथ 30 सितंबर 2020 से गुमशुदा हैं। इस संबंध में अगले ही दिन विजय विहार पुलिस थाने में गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज करा दी गई थी।

    कपड़ों के आधार पर की पहचान

    नहर में कार की बरामदगी के बाद समयपुर बादली थाना पुलिस विनोद कुमार के बेटे रवि और भाई सुरेश से बात की और कार में मिली चीजों को दिखाया। पुलिस का कहना है कि कार में मिले कपड़ों के आधार पर स्वजन ने शिनाख्त की।

    इसके बाद बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल में शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया। विनोद कुमार के बेटे रवि ने बताया कि अंतिम संस्कार कर दिया है। पुलिस ने डीएनए टेस्ट कराने के लिए कहा है। यह टेस्ट विजय विहार पुलिस कराएगी।

    पुलिस नहर में तलाश करती तो चार साल इंजतार नहीं करना पड़ता

    जीपीएस सिस्टम होने के बावजूद पुलिस कार को नहीं ढूंढ पाई। इसे पुलिस बड़ी लापरवाही ही कहा जाएगा कि जहां कार मिली है, वहां की लोकेशन आने के बाद भी पुलिस ने नहर में कार खोजने का प्रयास नहीं किया। विनोद कुमार के बेटे रवि ने बताया कि गुमशुदगी के बाद प़ुलिस के साथ कई बार इस लोकेशन पर आए, लेकिन आसपास खेतों में छानबीन की, लेकिन नहर में खोजने की कोशिश नहीं की गई।

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    पुलिस इस थ्योरी पर काम करती रही कि बदमाशों ने कार का जीपीएस निकालकर नहर में फेंक दिया और कार लेकर फरार हो गए।अगर उस समय नहर में तलाश की होती तो चार साल तक इंतजार नहीं करना पड़ता।