नई दिल्ली [डा. अरुणा सिंह]। अच्‍छी और गुणवत्‍तापूर्ण मेडिकल सेवाओं पर जोर दिये जाने से आजकल मेडिकल लैब टेक्निशियन का बड़ा महत्‍व देखा जा रहा है। ऐसा इसलिए कि छोटी से छोटी बीमारी के लिए डाक्टर मरीजों का विभिन्‍न तरह की जांच कराते हैं, ताकि असली मर्ज और उसकी स्थिति का पता चल सके। ऐसे में सही इलाज और दवा के लिए मेडिकल लैब टेक्निशियन की यह जिम्‍मेदारी होती है कि वह मरीज की सही रिपोर्ट पेश करे। इसलिए जहां भी इस तरह की रिपोर्ट तैयार होती हैं, उन प्रयोगशालाओं में काम करने के लिए इस तरह के प्रशिक्षित टेक्निशियंस की बड़ी जरूरत पड़ती है।

इन प्रशिक्षित टेक्निशियंस को ही मेडिकल लेबोरेट्री टेक्‍नोलाजिस्‍ट (एमएलटी) भी कहा जाता है। एमएलटी की पढ़ाई में बायो केमिस्‍ट्री, माइक्रोबायलॅाजी और ब्लड बैंकिंग जैसे विषयों के बारे में बताया जाता है। एमएलटी शरीर में रक्त, रक्त के

प्रकार, सेल या अन्य तरह के विभिन्‍न विश्लेषण करता है।

कामकाज का स्‍वरूप

मेडिकल लैब टेक्निशियन डाक्टरों के निर्देश पर काम करते हैं। उपकरणों के रखरखाव और कई तरह का काम भी इनके जिम्मे होता है। लेबोरेटरी में नमूनों की जांच और विश्लेषण में काम आने वाला घोल भी लैब टेक्निशियन ही बनाते हैं। इन्हें मेडिकल साइंस के साथ-साथ लैब सुरक्षा नियमों और जरूरतों के बारे में पूरा ज्ञान होता है। लैब टेक्निशियन नमूनों की जांच का काम करते हैं, लेकिन वे इसके परिणामों के विश्लेषण के लिए प्रशिक्षित नहीं होते।

नमूनों के परिणामों का विश्लेषण पैथोलॉजिस्ट या लैब टेक्नोलॉजिस्ट ही कर सकता है। जांच के दौरान एमएलटी कुछ सैंपलों को आगे की जांच या फिर जरूरत के अनुसार उन्हें सुरक्षित भी रख लेता है। एमएलटी का काम बहुत ही जिम्मेदारी और चुनौती भरा होता है। इसमें धैर्य और निपुणता की बड़ी आवश्यकता होती है।

कोर्स के दौरान पढ़ाई

मेडिकल लैब टेक्नोलाजिस्ट में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, डिग्री एवं मास्टर्स के दौरान बेसिक फिजियोलाजी, बेसिक बायोकेमिस्ट्री एंड ब्लड बैंकिंग, एनाटोमी एंड फिजियोलाजी, माइक्रोबायोलाजी, पैथोलाजी, एनवायर्नमेंट एंड 

बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलाजी एवं अस्पताल से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता है।

कोर्स एवं योग्यता

देश में अभी एमएलटी के लिए कई तरह के कोर्स कराए जा रहे हैं, जैसे कि सर्टिफिकेट इन मेडिकल लैब टेक्नोलाजी (सीएमएलटी)। यह छह महीने का कोर्स है, जिसके लिए योग्यता 10वीं पास है। वहीं डिप्लोमा इन मेडिकल लैब  टेक्‍नोलाजी के लिए 12वीं पास होना जरूरी है। इस कोर्स की अवधि एक साल है।

12वीं में प्रमुख विषय के रूप में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (पीसीबी) तथा फिजिक्स, केमिस्‍ट्री और मैथ्स (पीसीएम) के साथ पास होना अनिवार्य है। बीएससी इन एमएलटी के लिए 12वीं विज्ञान विष्‍यों के साथ तो उत्तीर्ण होना जरूरी है। साथ ही इस कोर्स की अवधि तीन वर्ष है। एमएससी इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलाजिस्ट (एमएलटी) प्रोग्राम में प्रवेश करने के लिए अभ्यर्थी के पास हाईस्कूल डिप्लोमा होना चाहिए। इसके बाद दो साल का एसोसिएट प्रोग्राम करना होता है। यह प्रोग्राम कम्युनिटी कालेज, टेक्निकल स्कूल, वोकेशनल स्कूल या विश्‍ववविद्यालय द्वारा कराया जाता है।

कहां-कहां हैं जॉब के अवसर

मेडिकल लेबोरेटरी टेक्निशियन को काम में निपुणता और जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण की भी आवश्‍यकता पड़ती है। छात्र इस तरह के प्रशिक्षण लेबोरेट्री कार्यों के दौरान अपनी सेवाएं देते हुए प्राप्त कर सकते हैं। अधिकतर राज्‍यों मेडिकल लेबोरेटरी टेक्निशियन के लिए कोई प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं होती, लेकिन कुछ राज्यों में इन टेक्निशियन के पास काम करने के लिए प्रमाण पत्र होना जरूरी है।

प्रमाण पत्र वाले टेक्निशियन के लिए इस क्षेत्र में बेहतर संभावनाएं होती हैं। आप किसी भी मेडिकल लेबोरेटरी, हास्पिटल, पैथोलाजिस्ट के साथ काम कर सकते हैं। ब्लड बैंक में इनकी खासी डिमांड रहती है। आप बतौर रिसर्चर या कंसल्टेंट खुद का क्‍लीनिक भी खोल सकते हैं।

सैलरी पैकेज

सामान्य तौर पर एक एमएलटी का वेतन 10 हजार रुपये से शुरू होता है, जबकि पैथोलॉजिस्ट को 30 हजार से 40 हजार रुपये तक सैलरी मिल जाती है। साथ ही योग्यता और तजुर्बे के आधार पर उनके वेतन में इजाफा होता चला जाता है। खास बात यह कि देश के साथ-साथ विदेश के मेडिकल लैब्‍स में भी इन टेक्निशियन की खासी डिमांड है।

प्रमुख संस्थान

दिल्ली पैरामेडिकल एंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली

www.dpmiindia.com

शिवालिक इंस्टीट्यूट आफ पैरामेडिकल टेक्नोलाजी, चंडीगढ़

www.shivalikinstitute.org

पैरा मेडिकल कालेज, दुर्गापुर, पश्चिम बंगाल

www.paramedicalcollege.org

इंडियन इंस्टीट्यूट आफ पैरामेडिकल साइंसेज, लखनऊ

www.iipsinstitute.com

डिपार्टमेंट आफ पैथोलाजी, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़

www.amu.ac.in 

(डीपीएमआइ के प्रिसिंपल डा. अरुणा सिंह से बातचीत पर आधारित)

Edited By: Mangal Yadav