Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    पढ़िये- दिल्ली के डॉक्टर ने बाढ़ में फंसे मरीज की वीडियो कॉल के जरिये कैसे बचाई जान

    खास बात यह रही कि इलाज मोबाइल पर वीडियो कॉल पर बताया गया और इलाज की प्रक्रिया बाढ़ग्रस्त इलाके में नाव में पूरी की गई।

    By JP YadavEdited By: Updated: Fri, 31 Jul 2020 10:23 AM (IST)
    पढ़िये- दिल्ली के डॉक्टर ने बाढ़ में फंसे मरीज की वीडियो कॉल के जरिये कैसे बचाई जान

    नई दिल्ली [लोकेश चौहान]। जरूरत के समय जो काम आए, वही सच्चा दोस्त होता है और चिकित्सक को भगवान का दर्जा दिया गया है। ये दोनों बातें एक साथ सार्थक हुईं, जब एक मुस्लिम फार्मासिस्ट ने असम में बाढ़ में फंसे लिवर सिरोसिस से पीड़ित अपने हिंदू दोस्त की जान बचाई। फार्मासिस्ट को इलाज की जानकारी दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के चिकित्सक ने मोबाइल पर दी। जिससे गंभीर मरीज की जान बच सकी। खास बात यह रही कि इलाज मोबाइल पर वीडियो कॉल पर बताया गया और इलाज की प्रक्रिया बाढ़ग्रस्त इलाके में नाव में पूरी की गई। फिलहाल मरीज की हालत स्थिर है। सर गंगाराम अस्पताल की तरफ से उसे एक माह की दवा भेजी गई हैं। असम में हालात सामान्य होने पर उसे इलाज के लिए दिल्ली लाया जाएगा।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    करीब एक पखवाड़े पहले असम के रहने वाले लालचंद बिस्वास के फार्मासिस्ट मित्र मोफिसुर रहमान ने गंगाराम अस्पताल के लिवर ट्रांसप्लांट के सलाहकार डॉ. उषांत धीर को फोन किया। रहमान ने बताया कि उसका दोस्त लालचंद लिवर सिरोसिस से पीडि़त है। वह इस समय बाढ़ में फंसा हुआ है। उसे बेहोशी सी आ रही है, सांस लेने में दिक्कत और पेट में सूजन हो रही है। डॉ. उषांत धीर ने अस्पताल प्रशासन के सहयोग से वीडियो कॉल के माध्यम से त्वरित चिकित्सा परामर्श की व्यवस्था की। इसमें एक बड़ी दिक्कत यह आई कि जिस जगह लालचंद फंसा हुआ था, वहां मोबाइल का नेटवर्क अच्छे से काम नहीं कर रहा था। ऐसे में लालचंद को नाव से ऐसी जगह लाया गया, जहां नेटवर्क उपलब्ध था। छोटी नाव पर इलाज उपलब्ध कराने को मोबाइल पर वीडियो कॉल की गई। उस समय एक और समस्या, भाषा को समझने और अपनी बात समझाने की सामने आई।

    इसके अलावा इंजेक्शन और एनीमा को नियंत्रित करने के लिए मदद की जरूरत थी। इस दौरान रहमान का फार्मासिस्ट होना काम आया और रहमान ने डॉ. उषांत धीर द्वारा बताई गई विधि से लालचंद का इलाज किया और कई इंजेक्शन लगाए। इलाज के एक घंटे के बाद डॉ. उषांत धीर ने फिर से रहमान से बातचीत की तो पता लगा कि लालचंद की हालत स्थिर हो गई है। डॉ. उषांत धीर ने बताया कि रोगी को न केवल चिकित्सकीय सलाह दी गई, बल्कि सर गंगाराम अस्पताल ने एक महीने के लिए उस तक जीवन रक्षक दवा पहुंचाने की व्यवस्था भी की।

    सर गंगाराम के आदर्शों का पालन करता है अस्पताल

    अस्पताल के अध्यक्ष डॉ. डीएस राणा का कहना है कि अस्पताल सर गंगाराम के आदर्शों का पालन करता है। वह हमेशा जरूरतमंद रोगियों के धर्म, फासले और वित्तीय स्थितियों के बावजूद मदद करने के लिए आगे रहे थे। रहमान ने कहा कि तत्काल इलाज के बिना उसके दोस्त की मौत हो जाती। वह उसकी मदद करना चाहता था, क्योंकि उसके पास परिवार का कोई सदस्य नहीं था, जो उसकी देखभाल कर सके। उन्होंने अस्पताल का आभार व्यक्त किया।