Delhi Heat: इस गर्मी में बढ़ेगी 'हीटवेव' की मार, देशभर में 15-20% तक बढ़ सकते हैं लू वाले दिन
इस गर्मी में दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश में लू के थपेड़े पड़ने वाले हैं। काउंसिल ऑन एनर्जी एनवायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) ने चेतावनी दी है कि इस बार लू चलने वाले दिनों की संख्या में 15 से 20 फीसदी तक का इजाफा हो सकता है। मौसम विभाग के इनपुट के आधार पर सीईईडब्ल्यू ने कहा कि वर्षा में बहुत ज्यादा अनिश्चितता दिखाई दे रही है।

संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) का दावा है कि इस बार की गर्मियों के दौरान दिल्ली एनसीआर सहित देशभर में लू वाले दिनों की संख्या 15 से 20 प्रतिशत तक का इजाफा हो सकता है।
मौसम विभाग से मिले इनपुट के आधार पर सीईईडब्ल्यू ने एक विश्लेषण जारी कर यह भी कहा कि वर्षा में बहुत ज्यादा अनिश्चितता दिखाई दे रही है, जैसे मानसून में भी देरी हो रही है। इसीलिए लू का प्रभाव बढ़ रहा है, प्रभावित हीट आइलैंड भी बढ़ रहे हैं। यहां तक कि लू का ओवरऑल सीजन बढ़ रहा है।
हीट एक्शन प्लान में तीन तरह के प्लान
सीईईडब्ल्यू के मुताबिक राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने 2019 में हीट एक्शन प्लान की संशोधित गाइडलाइन जारी की है। इसमें तीन तरह के प्लान हैं- पहला, राज्य के स्तर पर हीट एक्शन प्लान होता है, जिसमें लू के जोखिम वाले जिलों को चिन्हित करते हैं। दूसरा, जिलास्तरीय हीट एक्शन प्लान होते हैं, जिसमें लू के जोखिम वाले तहसीलों को चिन्हित करते हैं। तीसरा, सिटी लेवल एक्शन प्लान होते हैं, जिसमें लू के जोखिम वाले वार्ड को चिन्हित किया जाता है।
300 शहरों में एक्शन प्लान को लागू करने की योजना
सीईईडब्ल्यू के सीनियर प्रोग्राम लीड डॉ विश्वास चितले ने कहा, ''ठाणे नगर निगम ने सीईईडब्ल्यू के साथ मिलकर शहर के स्तर पर एक्शन प्लान को लागू किया है। इससे सामने आया है कि नौ में से दो वार्ड में लू का जोखिम बहुत ज्यादा है। हम इसी मॉडल को विभिन्न राज्यों की राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के साथ साझेदारी में 300 शहरों में लागू कर रहे हैं।
इस साल कई शहरों में एक्शन प्लान लागू होगा
इस साल हम लोग ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गुजरात, और गोवा के 50 शहरों के लिए सिटी एक्शन प्लान उपलब्ध कराना चाहते हैं। ये हीट एक्शन प्लान शहरी प्राधिकरणों को हीट के जोखिम वाले हॉटस्पॉट को चिन्हित करने में और हीटवेव का सामना करने के लिए तैयारी और प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करेंगे।''
उन्होंने यह भी कहा, ''शहरी प्राधिकरणों के पास सीमित संसाधन होते हैं, इसलिए सभी जगह पर एक साथ हीट एक्शन लागू करना संभव नहीं होता है। लिहाजा जहां सबसे ज्यादा जोखिम है, वहां इसे पहले लागू करना चाहिए।''
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, ला नीना प्रशांत महासागर में समुद्री तापमान को ठंडा कर दुनिया के कई हिस्सों में ठंडक बढ़ाता है। लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण अब इसका प्रभाव कमजोर पड़ रहा है।
इन वजहों से भी ज्यादा गर्म हो रहा मौसम
- मौसम को प्रभावित करने वाले पश्चिमी विक्षोभ कमजोर हो रहे। इनकी संख्या तो सामान्य लेकिन प्रभाव कम हो रहा।
- कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के चलते पहाड़ों पर भारी बर्फबारी वाले दिनों की संख्या भी घट रही।
- पश्चिमी विक्षोभ के चलते चक्रवाती हवा का क्षेत्र आमतौर पर बनता है, लेकिन कमजोर विक्षोभ के चलते ऐसा अब ज्यादा नहीं हो रहा।
- मजबूत चक्रवाती हवा का क्षेत्र नहीं बनने के चलते उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में वर्षा भी सामान्य से कम हो रही।
- कम वर्षा के चलते मौसम में नमी कम रहती है, इससे कोहरे वाले दिनों और कोहरे के घंटों में भी कमी आ रही।
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