नई दिल्ली, जेएनएन। केंद्र की नई सरकार में मंत्रियों के मंत्रालयों का बंटवारा हो गया है। इस बार दिल्ली-एनसीआर के चार सांसदों को मोदी कैबिनेट में जगह मिली है। दिल्ली की चांदनी चौक से सांसद डॉ. हर्षवर्धन को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा उन्हें विज्ञान और प्रौद्योगिकी, भूविज्ञान मंत्रालय का प्रभार दिया गया है। हर्षवर्धन ने बृहस्पतिवार को कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली थी।

चांदनी चौक से लगातार चुनाव जीते डॉ. हर्षवर्धन इससे पहले मोदी सरकार में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, पृथ्वी विज्ञान मंत्री थे। वे दिल्ली भाजपा के दिग्गज नेता हैं। 

डॉ हर्षवर्धन का राजनीतिक सफर
हर्षवर्धन बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य रहे हैं। वह बीजेपी के टिकट पर 1993 में कृष्णा नगर विधानसभा क्षेत्र से चुने गए और दिल्ली की पहली विधानसभा के सदस्य बने। 1996 में वे शिक्षा मंत्री बने। हर्षवर्धन 1998 और 2003 में फिर से कृष्णा नगर से विधानसभा के लिए चुने गये। 2008 विधानसभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्षद दीपिका खुल्लर को हराने के साथ ही इन्होंने विधानसभा की चौथी बार सदस्यता प्राप्त की। इस तरह हर्षवर्धन विधानसभा चुनाव इतिहास में कभी भी पराजित नहीं हुए।

राव इंद्रजीत सिंह को मिला ये विभाग
दिल्ली से सटे हरियाणा के गुड़गांव लोकसभी सीट से जीत दर्ज करने वाले राव इंद्रजीत सिंह को सांख्यिकी एंव कार्यक्रम क्रियान्वयन और निजोजन मंत्रालय सौंपा गया है। राव को राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है।

कृष्णपाल गुर्जर संभालेंगे ये मंत्रालय
दिल्ली से सटे हरियाणा के फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र से बड़ी जीत दर्ज करने वाले कृष्णपाल गुर्जर सामाजिक न्याय एंव सशक्तिकरण विभाग का राज्य मंत्री बनाया गया है। वे नई कैबिनेट में इन विभागों में राज्यमंत्री के तौर पर कामकाज देखेंगे। गुर्जर लगातार दूसरी बार केंद्र सरकार में मंत्री बनाए गए हैं।

वीके सिंह को मिला ये मंत्रालय
दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद सीट से लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करने वाले जनरल(रिटायर) वीके सिंह को सड़क, परिवहन और राजमार्ग का राज्यमंत्री बनाया गया है। नई मंत्रिमंडल में वीके सिंह सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में राज्य मंत्री के तौर पर कामकाज देंखेंगे।

वीके सिंह का राजनीतिक सफर
राजनीति में आये वीके सिंह को सिर्फ पांच साल ही हुए हैं। भारतीय थल सेनाध्यक्ष के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद वीके सिंह राजनीति में आये और भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़े। सेना से रिटायर होने के बाद अन्ना हजारे के आंदोलन से जुड़े और 2014 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ संसद में पहुंचे। इसके बाद उन्हें विदेश राज्यमंत्री बनाया गया था।
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Posted By: Mangal Yadav

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