बाहरी दिल्ली, [सोनू राणा]। Farmers: अनाज खरीदने वाली एजेंसियों की ओर से किसानों के साथ ‘बेईमानी’ की जा रही है। नरेला अनाज मंडी व एफसीआइ के गोदाम के गेट पर पोस्टर लगाया जाता है कि एमएसपी पर खरीद की जा रही है, लेकिन नरेला मंडी में गेहूं की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर नहीं हो रही और फूड कारपोरेशन आफ इंडिया (एफसीआइ) की ओर से खरीद ही नहीं की जा रही है। ऐसे में किसान परेशान हैं।

दोनों एजेंसियां अपनी-अपनी तरह से पूरी ईमानदारी दिखाते हुए किसानों से इस तरह से बेईमानी कर रही हैं कि किसानों को इस बात का अहसास भी नहीं होता कि वो ठगे जा रहे हैं। परेशान होकर किसान खुद ही एमएसपी के नीचे या आढ़तियों को दो फीसद कमीशन पर भी फसल बेचने को तैयार हो जा रहे हैं, क्योंकि किसानों के पास इतनी जगह है ही नहीं कि वे उसे स्टोर कर सकें।
लाडपुर गांव के किसान सुभाष चंद्र व सतबीर ने बुधवार को बताया कि दो दिन से उनकी गेहूं से भरी ट्राली नरेला के एफसीआइ के गोदाम में खड़ी है। एक ट्राली तो एफसीआइ की ओर से खरीद ली गई है, लेकिन एक बाकी है। बुधवार शाम को एफसीआइ के अधिकारियों की ओर से कह दिया गया कि और खरीद नहीं की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने कहा है कि नरेला मंडी के चेयरमैन ने उन्हें खरीद करने के लिए मना किया है। सूत्रों के अनुसार बुधवार को 300 बोरी गेहूं की खरीद एफसीआइ की ओर से की गई।
एफसीआइ के गोदाम में पांच ट्राली गेहूं से भरी खड़ी हैं। उनकी खरीद नहीं की जा रही है। हम आज गेहूं लेकर आने वाले थे, लेकिन जब इनकी ही खरीद नहीं की जा रही है तो हमारी कैसे होगी। (-सतबीर डबास, किसान)

दो दिन से मंडी में गेहूं से भरी ट्राली खड़ी है। एक ट्राली एफसीआइ की ओर से खरीद ली गई, लेकिन अब अधिकारी बोल रहे हैं कि और गेहूं की खरीद नहीं होगी। नौ हजार रुपये का तेल गेहूं को लाने व ले जाने में लग जाएगा।
(सुभाष चंद्र, किसान, लाडपुर गांव)
सुबह ट्राली भरकर गेहूं लेकर आया था। देर रात तक गेहूं की खरीद नहीं की गई। खरीद एजेंसी के इस प्रकार के रवैये की वजह से काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
(सतीश, किसान, लाडपुर गांव)

गुप्ता ने मंगलवार को कहा था कि वे उन किसानों को सर्टिफिकेट देंगे, जिनके पास गिरदावरी नहीं है। इस सर्टिफिकेट की मदद से एफसीआइ उनके गेहूं को खरीद लेगी, लेकिन काफी देर तक गेहूं की खरीद नहीं हुई।
(-अनिल, किसान, बांकनेर गांव)
मुङो ईमेल के बारे में कुछ मालूम नहीं है। मुङो सर्टिफिकेट पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया था, मैंने कर दिए। ईमेल भेजने का मेरे पास अधिकार ही नहीं है। (-संजय गुप्ता, चेयरमैन, नरेला अनाज मंडी)

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