नई दिल्ली [संजीव कुमार मिश्र]। घना नीम का पेड़..चारों तरफ औषधीय तुलसी..गिलोय और चंद कदम की दूरी पर बछड़े को दुलारती गाय। यह नजारा भला किसके दिल को नहीं छू लेगा। लेकिन यह सारी कवायद सिर्फ आंखों को सुकून देने के लिए नहीं हैं..जी हां, यह स्वाद के जरिये स्वास्थ्य बेहतर करने की उस कवायद का हिस्सा है जिसे लक्ष्मीबाई कालेज ने शुरू की है।

लक्ष्मीबाई कालेज छात्रों व आम लोगों को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले जायकों का स्वाद चखाएगा। इसके लिए मिनी बस को किचन में तब्दील किया गया है। मेन्यू में विभिन्न राज्यों के जायके ही शामिल होंगे। खाना केले के पत्ते और मिट्टी के बर्तन में परोसा जाएगा। खाने वालों को देसी जायके के लाभ भी बताए जाएंगे। इसे परंपरा नाम दिया गया है।

कालेज प्राचार्या डा. प्रत्यूष वत्सला ने बताया कि बर्गर, पिज्जा आदि फास्ट फूड से नुकसान ज्यादा है। कोरोना काल में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले जायकों को लेकर काफी चर्चा हुई। कालेज ने छात्रों समेत आम लोगों को ऐसे जायके के प्रति जागरूक करने के मकसद से यह पहल की है।

बकौल प्राचार्या कालेज की एक पुरानी मिनी बस को किचन में तब्दील किया गया है। कालेज के गेट नंबर 3 पर नीम, तुलसी और गिलोय की प्रचुरता है। कालेज परिसर में रह रही गाय एवं बछड़े को भी पास ही बांधा जाएगा। बस यहां शाम में तीन बजे से रात नौ बजे तक रहेगी। कालेज ने इसके लिए एक कंपनी से करार किया है।

कार्यवाहक कुलपति ने चखा स्वाद

कार्यवाहक कुलपति प्रो पीसी जोशी, कुलसचिव डा. विकास गुप्ता भी परंपरा की खासियत जानने पहुंचे। कालेज छात्रओं द्वारा बनाए गए शलजम के लड्डू का स्वाद भी चखा। प्राचार्या डा. प्रत्यूष वत्सला ने बताया कि लिट्टी चोखा, बाजरा चीला, सत्तू, चुकंदर मोदक आदि का जायका यहां मिलेगा। कालेज का गृह विज्ञान विभाग देसी जायकों की एक सूची तैयार कर रहा है। छात्र प्रत्येक जायके में मौजूद कैलोरी, प्रोटीन, काबरेहाइड्रेड आदि की जानकारी भी खाने वालों को देंगे।

Edited By: Mangal Yadav