FIR के बाद भी शास्त्री पार्क से अतिक्रमण नहीं हटा पाई पुलिस, समस्या बरकरार
पूर्वी दिल्ली के शास्त्री पार्क रोड पर अतिक्रमण की समस्या बरकरार है। पुलिस ने अतिक्रमण के खिलाफ एफआईआर दर्ज की लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। फल विक्रेता सड़क पर ठेला लगाकर अतिक्रमण कर रहे हैं जिससे वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस सिर्फ खानापूर्ति के लिए कार्रवाई करती है और निगम के साथ मिलकर अतिक्रमण हटाती है।

जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली। लोगों में दिल्ली पुलिस का कितना खौफ है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस अतिक्रमण को लेकर तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर देती है। इसके बाद भी शास्त्री पार्क रोड से अतिक्रमण नहीं हटा पाती।
अतिक्रमण हटाना तो दूर, यहां पुलिस कार्रवाई का जरा सा भी फर्क नजर नहीं आता। अतिक्रमण हमेशा की तरह हो रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि पुलिस ने कार्रवाई तो की, लेकिन उसका असर क्यों नहीं दिख रहा। कार्रवाई महज औपचारिकता बनकर रह गई है।
शास्त्री पार्क में सड़क किनारे ठेला लगाकर फल बेचने वाले लोग सड़क पर अतिक्रमण करने के साथ ही वाहन चालकों के रास्ते में भी रुकावट पैदा करते हैं। इन्हें निगम और पुलिस का कोई डर नहीं है। वाहन चालक इस समस्या से बेहद परेशान हैं।
जनप्रतिनिधियों से लेकर अफसरों तक, सभी इस समस्या से वाकिफ हैं। शुक्रवार को शास्त्री पार्क थाने के कांस्टेबल रंजीत ने तीन फल विक्रेताओं फिरोज खान, दिलशाद, शमीम के खिलाफ सरकारी सड़क पर अतिक्रमण करने की धारा में केस दर्ज किया। आम लोगों को उम्मीद थी कि एफआईआर के बाद सड़क से ठेला-खोमचा वालों का अतिक्रमण हट जाएगा।
रविवार को सड़क पर ठेला लगाकर फल विक्रेताओं ने अपनी रेहड़ियाँ लगा ली थीं। पुलिस कार्रवाई के बारे में जब फल विक्रेताओं से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि सड़क पर रेहड़ियाँ लगाने के लिए निगम और पुलिस को पैसे मिलते हैं। बीच-बीच में पुलिस को भी कुछ कार्रवाई दिखानी पड़ती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अतिक्रमण हटाना पुलिस के लिए कोई बड़ा काम नहीं है। एफआईआर इसलिए दर्ज की जाती है ताकि कुछ सुधार दिखे। पुलिस ने सिर्फ़ खानापूर्ति के लिए कार्रवाई की है। इस मामले में पुलिस का कहना है कि पुलिस समय-समय पर अतिक्रमणकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करती है। निगम के सहयोग से अतिक्रमण भी हटाया जाता है।
बीएनएस की धारा 285 के तहत एफआईआर दर्ज
अगर कोई व्यक्ति सरकारी ज़मीन पर सड़क का अतिक्रमण करता है, तो पुलिस उसके खिलाफ बीएनएस की धारा 285 के तहत कार्रवाई करती है। इस धारा में आरोपी पर पाँच हज़ार रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
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