नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। यमुना का प्रदूषण कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने सभी कामन इफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की जल गुणवत्ता के मानक नए सिरे से निर्धारित कर दिए हैं। अब किसी भी औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों को सीईटीपी के लिए प्रदूषित जल छोड़ते हुए उसमें प्रदूषक तत्वों की मात्र और भी सीमित करनी होगी। नए मानक तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। इनका पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी औद्योगिक क्षेत्रों की होगी और उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई का भी प्रविधान रखा गया है।

इस आशय का आदेश डीपीसीसी के चेयरमैन संजीव खिरवार ने जारी किया है। इसके मुताबिक सन 2016 में सीईटीपी के मानक केंद्रीय पर्यावरण मंत्रलय ने अधिसूचित किए थे। हालांकि मंत्रलय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह छूट भी दी थी कि वे अपनी जरूरत के अनुरूप इन्हें और सख्त कर सकते हैं। इसी के मद्देनजर एक विशेषज्ञ समिति गठित की गई। इस समिति की अनुशंसा पर ही पुराने मानकों में बदलाव करने का निर्णय लिया गया।

चूंकि दिल्ली में सभी औद्योगिक इकाइयों का प्रदूषित जल सीईटीपी से शोधित होकर अंतत: यमुना में ही जाता है, इसलिए डीपीसीसी ने प्रदूषण को कम करने के लिए सीईटीपी के लिए छोड़े जाने वाले दूषित जल में प्रदूषक के स्तर को घटाकर काफी कम कर दिया है। यही नहीं, अनुमति के बगैर कोई भी औद्योगिक इकाई अब बोरवैल से भूजल का दोहन नहीं कर सकेगी।

Edited By: Pradeep Chauhan