नई दिल्ली [रीतिका मिश्रा]। शिक्षा ही एक मात्र ऐसा साधन है जिसके माध्यम से हम अपने भविष्य की नींव तैयार करते हैं। लेकिन ये नींव तब तक कमजोर है जब तक इसमें जीवन कौशल शिक्षा का ज्ञान न हो। छात्रों के व्यक्तित्व का सही विकास हो इसके लिए जरूरी है उसके संपूर्ण पहलुओं पर ध्यान रखा जाए। बिना जीवन कौशल शिक्षा के ये अधूरा है। ये कहना है दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के उपायुक्त प्रेम शंकर झा का। 2007 बैच के भारतीय रेल सेवा अधिकारी प्रेम शंकर झा वर्तमान में विज्ञापन, पार्किंग, भूमि और संपत्ति और गृह विभाग देख रहे हैं।

 

अपने कार्यकाल में उन्होंने एसडीएमसी का रेवन्यू 34 करोड़ से 150 करोड़ तक पहुंचा कर न सिर्फ रेवन्यू मैन का खिताब हासिल किया बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी कई ऐसे कार्य किए हैं जो शिक्षा जगत में मील का पत्थर साबित होंगे। वो कहते हैं कि हमारी शिक्षा पद्धति केवल रटने पर ही ध्यान देती है लेकिन असल जीवन में रटा हुआ शायद ही कहीं काम आता है। वो कहते हैं कि आज के बच्चों के लिए जरूरी है कि उनका सामाजिक विकास हो। वे व्यवहार कुशल बनें। उनके अंदर किसी समस्या का समाधान करने की क्षमता हो और साथ ही निर्णय लेने की क्षमता भी हो। यह चीजें केवल किताबी ज्ञान से अर्जित नहीं की जा सकतीं। उनके मुताबिक जीवन कौशल शिक्षा एक मात्र ऐसी शिक्षा है जिसे स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाकर बेहतर नतीजे हासिल किए जा सकते हैं।

उन्होंने इसकी महत्ता को समझते हुए साल 2013 में ही देशभर के छात्रों के लिए जीवन कौशल पर कुल आठ किताबें लिखी हैं। ये किताबें उन्होंने कक्षा एक से आठ तक के छात्रों के लिए लिखी हैं। जिसमें लगभग 84 जीवन कौशल गुणों के बारे में विस्तार से बताया गया है। उनके मुताबिक जीवन कौशल शिक्षा न सिर्फ छात्रों में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सहायक हैं बल्कि इससे छात्र के व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास होता है जिससे उसे जीवन की परेशानियों से जूझने और संघर्ष करने का हौसला मिलता है।

वो बताते हैं कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में पहली बार जीवन कौशल शिक्षा का उल्लेख किया गया है पर ये अभी भी विस्तार से नहीं है। शिक्षकों को नहीं पता कि जीवन कौशल शिक्षा के क्या-क्या गुण छात्रों को सिखाने चाहिए। उनके मुताबिक शिक्षक छात्रों को इस शिक्षा को बेहतर तरीके से सिखा सके इसके लिए वह शिक्षकों के लिए भी एक किताब लिख रहे हैं जो उन्हें जीवन कौशल शिक्षा पढ़ाने के तरीके बताएगी। उनके मुताबिक जीवन कौशल पर उनके द्वारा लिखी किताबें अकादमिक विकास और जीवन कौशल शिक्षा के बढ़ते गैप को कम करने का कार्य करेंगी।

वहीं, उन्होंने दक्षिणी दिल्ली निगम के शिक्षा विभाग में अतिरिक्त शिक्षा निदेशक के पद पर रहते हुए विद्यालय स्तर पर गुणात्मक परिवर्तन लाने के लिए स्कूल क्वालिटी इनहैंसमेंट प्रोग्राम शुरू किया था। इसमें उन्होंने विभिन्न स्वयं सेवी संस्थाओं से सरकारी स्कूलों को गोद लेने की अपील की। साथ ही उनसे कहा कि स्कूलों को गोद लेकर वो छात्रों की सीखने की क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में कार्य करे।

प्रधानमंत्री को मानते हैं प्रेरणा स्त्रोत

प्रेम शंकर झा बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके प्रेरणा स्त्रोत हैं। उनके मुताबिक जिस प्रकार प्रधानमंत्री के लिए देश सर्वोपरि है ठीक उसी प्रकार उनके लिए भी देश पहले है। वो बताते हैं कि वो जब भी कोई नई नीति बनाते हैं तो हमेशा इस बात को मन में रखते हैं कि इससे देश का, देश में रहने वाले नागरिकों का किस प्रकार हित होगा।

युवाओं को देशभक्त बनने के लिए करते हैं जागरूक

प्रेम बताते हैं कि भारत के संविधान ने अपने नागरिकों को अन्य देशों के मुकाबले बेहतर अधिकार दिए हुए हैं, लेकिन इन अधिकारों के साथ-साथ यहां रहने वाले नागरिकों के देश के प्रति कुछ दायित्व भी हैं। नागरिक जहां अपने अधिकारों का लाभ उठाते हैं तो उन्हें देश के प्रति अपने कर्तव्यों को भी पूरा करना चाहिए। हर व्यक्ति अपने पथ से बिना भटके एक सच्चा देशभक्त बनकर अपने कर्तव्यों का पालन करे इसके लिए वो समय-समय पर युवाओं को प्रेरित भी करते हैं। उन्होंने सिविल सेवाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए भी किताब लिखी है साथ ही वो अपने जीवन में कैसे निर्णय ले इसके लिए उन्होंने ‘डिसीजन मेकिंग’ नाम से एक किताब लिखी। इसके साथ ही वह सिविल सेवा की तैयारी कर रहे युवाओं को जरूरी भी टिप्स देते है ताकि वह सिविल सेवा में चयन होने के बाद राष्ट्र निर्माण में अपना अहम योगदान दे सकें।

जीवन कौशल शिक्षा के 10 प्रमुख गुण

प्रेम ने यूं तो जीवन कौशल शिक्षा पर लिखी गई किताबों में 84 जीवन कौशल गुणों का उल्लेख किया है। पर इसमें 10 प्रमुख गुण ये हैं। इसमें सकारात्मक रहें, आत्मसम्मान, भावनात्मक गुण, आत्म विकास, अच्छा श्रोता बनना, विजेता बनने के लिए जरूरी आदतें, निराशाओं से निपटना, कैसे सही निर्णय ले, समस्या हल करने वाला कैसे बने और पर्यावरण के अनुकूल कैसे बने।

Edited By: Prateek Kumar

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