चर्चित सीट: सुल्तानपुर सीट पर कभी नहीं खिला 'कमल', हर बार रहा कांग्रेस का दबदबा; इस बार होगी कांटे की टक्कर
Delhi Vidhan Sabha Chunav 2025 सुल्तानपुर माजरा सीट पर कभी कमल नहीं खिला है। इस विधानसभा पर कांग्रेस का दबदबा रहा है। इस बार फिर से जय किशन और मुकेश अहलावत के बीच मुकाबला है। भाजपा ने कर्म सिंह कर्मा पर भरोसा जताया। जानिए आखिर इस सीट का पूरा चुनावी इतिहास क्या है और इस बार कौन-कौन मैदान में हैं।

धर्मेंद्र यादव, बाहरी दिल्ली। दिल्ली के आरक्षित विधानसभा क्षेत्र सुल्तानपुर माजरा में आज तक कभी कमल नहीं खिल पाया है। अब तक हुए सभी सात विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा है। पांच चुनाव जीत चुकी कांग्रेस आज अपने राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई लड़ रही है।
इन पांच जीत के नायक जय किशन लगातार दो चुनाव हार चुके हैं। कांग्रेस ने उन्हें आठवीं बार चुनाव मैदान में उतारा है, उनका मुकाबला इस बार भी आम आदमी पार्टी सरकार में मंत्री मुकेश कुमार अहलावत से है।भाजपा ने सुल्तानपुर माजरा में कमल खिलाने की जिम्मेदारी कर्म सिंह कर्मा को दी है। सुल्तानपुर का 'सुल्तान' बनने के लिए सभी दलों के प्रत्याशियों ने एडी-चोटी का जोर लगा रखा है।
कांग्रेस लड़ रही अपने अस्तित्व की लड़ाई
1976 में पुनर्वास कालोनी के रूप में बसी सुल्तानपुरी के नाम से ही इस विधानसभा का नाम सुल्तानपुर माजरा रखा गया है। 1993 में अस्तित्व में आई सुल्तानपुर माजरा विधानसभा सीट भाजपा, कांग्रेस व आम आदमी पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी है। यहां कांग्रेस अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है तो भाजपा अपनी पहचान के लिए जूझ रही है। आप उम्मीदवार यहां से जीत की हैट्रिक के लिए पसीना बहा रहे हैं।
कांग्रेस ने जय किशन को सातवीं बार मैदान में उतारा
इस सीट पर 1993 से लेकर 2013 तक कांग्रेस का एक छत्र राज रहा है। पिछले 20 साल के दौरान हुए पांच चुनाव में चार बार जय किशन और एक बार उनकी पत्नी सुशीला ने जीत दर्ज की है। अपने राजनीतिक दुर्ग में लगातार दो हार का सामना करने वाले जय किशन को कांग्रेस ने सातवीं बार मैदान में उतारा है।
इस सीट से जय किशन के दो दशक के राजनीतिक तिलिस्म को आम आदमी पार्टी ने चुनौती दी है। 2013 के चुनाव में जय किशन 11 सौ मतों के मामूली अंतर से आप प्रत्याशी संदीप कुमार से जीत गए, लेकिन दो साल बाद हुए चुनाव में संदीप ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की। जयकिशन तीसरे स्थान पर रहे।
2020 में फिर आप पार्टी का झाडू चला। आप प्रत्याशी मुकेश अहलावत ने जीत दर्ज की। भाजपा दूसरे और कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही। इस चुनाव में आप पार्टी ने दोबारा मुकेश अहलावत को मौका दिया है। यहां लगातार तीसरी जीत का लक्ष्य लेकर मुकेश अहलावत चुनाव मैदान में उतरे हैं।
भाजपा के लिए राहत की बात क्या?
सुल्तानपुर माजरा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की राह बेहद कठिन व चुनौतीपूर्ण है। यहां से भाजपा कभी कोई चुनाव नहीं जीत सकी है। भाजपा के लिए राहत की बात यह है कि पिछले चुनाव में उसके मत प्रतिशत में लगभग 10 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। 2015 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी प्रभुदयाल को 13.71 प्रतिशत मत मिले थे, 2020 में रामचंद्र चावरिया ने 23.65 प्रतिशत मत प्राप्त किए थे।
इस बार भाजपा ने सुल्तानपुर माजरा से कर्म सिंह कर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया है। पिछली बाद भाजपा ने उन्हें मंगोलपुरी से टिकट दी थी।मंगोलपुरी में कर्म सिंह आप प्रत्याशी राखी बिरला से 30 हजार से अधिक मतों से हार गए थे। सुल्तानपुर राजनीतिक दुर्ग का 'सुल्तान' का ताज किसके सिर सजेगा, यह तो आठ फरवरी को पता चलेगा। लेकिन, फिलहाल यहां चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना बन रही हैं।
भाजपा ने हर चुनाव में उतारे नए चेहरे
सुल्तानपुर माजरा सीट से भाजपा हर बार नए चेहरे के साथ चुनाव में उतरी है। यानि, एक बार मौका देने के बाद भाजपा ने कभी किसी उम्मीदवार को दोबारा टिकट नहीं दी। 1993 से लेकर 2025 तक हर बार भाजपा ने इस सीट से नए प्रत्याशी को मैदान में उतारा है। दूसरी ओर कांग्रेस ने आठों चुनाव में जय किशन (एक बार उनकी पत्नी को टिकट दी) पर ही दांव लगाया है। आप पार्टी ने दो बार संदीप कुमार और अब दूसरी बार मुकेश अहलावत को टिकट दी है।
वर्ष जीते प्राप्त मत प्रतिशत हारे(पार्टी)
1993 जयकिशन (कांग्रेस) 20890 37.75 नंदराम बागड़ी(जनता दल)
1998 सुशीला देवी(कांग्रेस) 34194 56.79 कैलाश(भाजपा)
2003 जयकिशन(कांग्रेस) 36164 52.27 सतीश कुमार(भाजपा)
2008 जयकिशन(कांग्रेस) 39542 48.19 नंदराम बागड़ी(भाजपा)
2013 जयकिशन(कांग्रेस) 31458 29.79 संदीप कुमार(आप)
2015 संदीप कुमार(आप) 80204 69.50 प्रभुदयाल (भाजपा)
2020 मुकेश अहलावत(आप) 74573 66.51 रामचंद्र चावरिया(भाजपा)
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