Delhi WaterLogging: दिल्ली वालों के लिए गुड न्यूज, अब गड्ढा मुक्त होंगी सड़कें; मानसून में भी नहीं रुकेगा काम
Delhi WaterLogging को लेकर पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि दिल्ली की जनता को बेहतर सुरक्षित और गड्ढामुक्त सड़कें देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ईकोफिक्स’ तकनीक से हमें मानसून से पहले और मानसून के समय सड़कों की समयबद्ध और टिकाऊ मरम्मत करने में बड़ी मदद मिलेगी।कहा कि दिल्ली अब स्मार्ट और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर तेजी से आगे बढ़ रही है।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। सड़कों पर गड्ढा भरने के लिए अब एक नई क्रांति की शुरुआत होने जा रही है, अब मानसून के दौरान होने वाले गड्ढों को भी आसानी से भरा जा सकेगा। खास बात यह है कि अगर गड्ढा गीला है और उसमें पानी भी है तो भी उसे भरने में कोई अड़चन नहीं आएगी। गड्डा कम से कम ढाई साल तक फिर से नहीं बनेगा। इस तकनीक को सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) ने विकसित किया है, जिसे ईकोफिक्स नाम दिया है।
मंत्री ने कहा- सफल रहा परीक्षण
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी ) ने शनिवार को स्टील स्लैग आधारित गड्ढों को भरने की इस नई तकनीक का तकनीकी परीक्षण दिल्ली सचिवालय रोड पर किया। जिसे देखने के लिए लोक निर्माण मंत्री प्रवेश वर्मा भी पहुंचे थे, मंत्री ने इस तकनीक की सराहना की और परीक्षण को सफल बताया है।
यहां बता दें कि ईकोफिक्स एक रेडी-टू-यूज पाटहोल रिपेयर मिक्स है, जिसे सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) ने मान्यता प्राप्त स्टार्टअप रामुका ग्लोबल सर्विसेज के साथ मिलकर विकसित किया है। सीआरआरआई और रामुका की टीम द्वारा किए गए लाइव प्रदर्शन में जलभराव वाले और सूखे दोनों प्रकार के गड्ढों को बिना किसी जल निकासी के सफलतापूर्वक भरा गया।
दिल्ली के लोक निर्माण विभाग के मंत्री प्रवेश वर्मा।
क्या है इस तकनीक की खासियत?
इस तकनीक में प्रमुख बात यह रही कि मरम्मत के मात्र 15 से 20 मिनट बाद सड़क को यातायात केलिए खोल दिया गया, जिससे आम लोगों को कोई असुविधा नहीं हुई। तकनीक के आविष्कारक और सीआरआरआई के वरिष्ठ प्रमुख वैज्ञानिक सतीश पांडेय ने जानकारी दी कि यह मिक्स स्टील उद्योग के मेटलर्जिकल वेस्ट यानी स्टील स्लैग से तैयार किया गया है।
यह टिकाऊ और किफायती है, साथ ही प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भरता को भी कम करता है, जिससे पर्यावरण की रक्षा होती है। रेडी-टू-यूज़ पाटहोल रिपेयर मिक्स को तैयार करने के बाद आठ माह तक बैग में पैक कर रखा जा सकता है और जरूरत पड़ने पर इसका उपयोग किया जा सकता है।इसमें गिट्टी का उपयोग नहीं होगा। इसकी जगह स्टील फैक्ट्रियों का कचरा और मोडीफाई कोलतार का उपयोग होता है।
कंपनी देगी ढाई साल की वारंटी
मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि इस तकनीक को लागू करने वाली कंपनी ने ढाई साल की वारंटी देने का वादा किया है, अगले ढाई वर्षों तक यदि किसी भी तरह की मरम्मत की आवश्यकता होगी तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी की होगी।
मंत्री ने कहा कि यह हरित पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘वेस्ट टू वेल्थ’ (कचरे से संपत्ति) विजन को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है, जिसमें औद्योगिक अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में बदलकर टिकाऊ बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार और पीडब्ल्यूडी इस तकनीक का विस्तृत मूल्यांकन कर रही है, ताकि इसे बड़े पैमाने पर लागू किया जा सके। इस मौके पर डीएसआइआर के सचिव एवं सीआरआरआई के महानिदेशक डा एन. कैलैसेल्वी, पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता नईमुद्दीन, सीआरआरआई के संयुक्त सचिव (प्रशासन) महेंद्र कुमार गुप्ता व निदेशक डा मनोरंजन परिदा आदि अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।