नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। घर का सामान लेने निकले युवक की दंगे के दौरान दयालपुर इलाके में हत्या करने के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने आरोपित को जमानत देने से इन्कार कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट्ट के कोर्ट ने कहा कि साक्ष्यों से स्पष्ट होता है कि आरोपित आरिफ घटना के वक्त मौके पर था। वह वहां दर्शक मात्र नहीं था, बल्कि दंगे में सक्रिय रूप से शामिल था। कोर्ट ने बचाव पक्ष की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि आरिफ पर हत्या का मुकदमा नहीं बनता।

कोर्ट ने आदेश में आरोपित दंगाई भीड़ का हिस्सा था, इस कारण उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या का मुकदमा बनता है। 24 फरवरी, 2020 को दयालपुर इलाके में दंगाइयों ने युवक राहुल सोलंकी की गोली मार कर हत्या कर दी थी। दंगाइयों ने बाबू नगर तिराहा स्थित राजधानी पब्लिक स्कूल से थोड़ी दूरी पर पाल डेयरी वाली के पास हत्या को अंजाम दिया था। उस वक्त राहुल घर का सामान लेने के लिए निकले थे।

इस मामले में कई आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। उनमें से आरोपित आरिफ ने जमानत अर्जी लगाते हुए कोर्ट को बताया कि नौ मार्च 2020 से न्यायिक हिरासत में है। उसके वकील ने दलील दी कि युवक की मौत गोली लगने से हुई है। वीडियो फुटेज में साफ है कि आरिफ ने हाथ में डंडा पकड़ा हुआ था, ऐसे में हत्या में वह शामिल नहीं है।

अभियोजन पक्ष ने दलील देते हुए कहा कि इलाके की कई सीसीटीवी कैमरों की फुटेज व तस्वीरों को पेश किया, जिसमें आरोपित दंगाइयों के साथ दिख रहा था। इसके अलावा मृतक के भाई और पिता के अलावा चश्मदीद गवाह के बयानों को कोर्ट के समक्ष रखा। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपित की जमानत अर्जी खारिज कर दी। साथ ही कहा कि बाहर निकलने पर आरोपित द्वारा गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है। 

Edited By: Prateek Kumar

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