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    Delhi Pollution: दिल्ली-NCR में जहरीली हवा फूला रही सांसें, आने वाले दिनों में पराली भी बढ़ाएगी मुश्किल

    By Jagran NewsEdited By: Narender Sanwariya
    Updated: Sat, 14 Oct 2023 06:45 AM (IST)

    Delhi Pollution बदलते मौसम के साथ ही दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) की हवा जिस तेजी से बदल रही है उनमें आने वाले दिन दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए भारी पड़ेंगे। दिल्ली-एनसीआर पर आने वाले इस खतरे के संकेत सफर इंडिया (Safar India) की रिपोर्ट से मिल रहा है जिसके तहत पराली जलने की घटनाएं सात अक्टूबर से ही शुरू हो गई है।

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    Delhi Pollution: दिल्ली-NCR में जहरीली हवा फूला रही सांसें, आने वाले दिनों में पराली भी बढ़ाएगी मुश्किल

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। बदलते मौसम के साथ ही दिल्ली-एनसीआर की हवा जिस तेजी से बदल रही है, उनमें आने वाले दिन दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए भारी पड़ेंगे। लोगों को आंतरिक प्रदूषण के साथ ही हरियाणा और पंजाब में जल रही पराली के जहरीले धुएं का सामना भी करना पड़ सकता है। जो न सिर्फ लोगों की सांसें फूलाएगा बल्कि बुजुर्गों और बच्चों के लिए जानलेवा भी हो सकता है।

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    15 अक्टूबर के बाद बढ़ सकती है मुश्किल

    फिलहाल जो संकेत मिल रहे है उनमें दिल्ली- एनसीआर के लोगों की यह दिक्कतें 15 अक्टूबर के बाद बढ़ सकती है। 20 नवंबर तक खतरनाक स्थिति में रह सकती है। पराली की जहरीली हवाओं ने दिल्ली- एनसीआर में दस्तक देना शुरू कर दिया है। दिल्ली-एनसीआर पर आने वाले इस खतरे के संकेत सफर इंडिया की रिपोर्ट से मिल रहा है, जिसके तहत पराली जलने की घटनाएं सात अक्टूबर से ही शुरू हो गई है।

    इस दौरान 12 अक्टूबर को भी पराली जलने की करीब दो सौ मामले दर्ज की गई है। इतना ही नहीं, दिल्ली- एनसीआर की हवाओं में इनकी मौजूदगी भी दर्ज होने लगी है। रिपोर्ट के तहत 11 अक्टूबर को दिल्ली-एनसीआर की हवाओं में पराली के जलने से उठने वाले धुएं ही हिस्सेदारी करीब चार प्रतिशत तक दर्ज की गई है।

    सूत्रों की मानें तो यह स्थिति नहीं थमीं, तो इस महीने के अतं तक यानी 31 अक्टूबर के आसपास दिल्ली-एनसीआर की हवाओं में पराली के जलने वाले धुएं की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 30 प्रतिशत तक हो सकती है। जो दिल्ली-एनसीआर के लिए काफी खतरनाक स्थिति होगी।

    वायु गुणवत्ता के लिहाज से अक्टूबर से फरवरी तक समय वैसे भी दिल्ली-एनसीआर के लिए काफी खराब रहता है क्योंकि इस दौरान यहां कम दबाव का क्षेत्र बन जाता है। जिसमें वायु प्रदूषण के कण ऊपर उठने के बजाय स्माग बनकर जमीन की सतह से नजदीक ही छाए रहते है।

    फिलहाल पिछले सालों की स्थिति पर नजर दौड़ाएं तो पहले की तुलना में स्थितियों में सुधार हो रहा है। खराब वायु गुणवत्ता वाले दिनों की संख्या कम हो रही है। हालांकि, इस सब के पीछे बड़ी वजह इंद्रदेव की कृपा भी रही है, क्योंकि संकट के दौरान बारिश होने से वायु मंडल में छाया प्रदूषण साफ गया था।

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