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    दो साल में 50 से अधिक मौतों के बाद चेती दिल्ली सरकार, अब कराया जा रहा ड्रोन से सर्वे

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 08:15 PM (IST)

    दिल्ली में खुले नालों में गिरने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। हाल ही में स्वतंत्रता दिवस पर एक बच्चे की मौत हो गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले दो वर्षों में 50 लोगों की जान जा चुकी है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इसे मानवाधिकार उल्लंघन माना है। दिल्ली सरकार ने अब खतरनाक नालों की पहचान के लिए ड्रोन सर्वे कराने का फैसला किया है ताकि उन्हें सुरक्षित बना सकें।

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    दिल्ली में खुले नालों के कहर बरपाने के बाद अब सरकार करा रही ड्रोन सर्वेक्षण।

    अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के वेलकम इलाके में पतंग लूटने के दौरान सात साल का बच्चा खुले नाले में गिर गया। दो दिन बाद उसके शव को नाले से निकाला जा सका।

    इसी तरह 10 जुलाई को नजफगढ़ के प्रेमविहार में खेलते हुए 11वर्ष की बच्ची खुले नाले में गिर गई। उसकी किस्मत अच्छी थी कि लोगों की नजर उस पर पड़ गई, वहां काम कर रहे एमसीडी कर्मी ने रस्सी बांध तुरंत ही नाले में छलांग लगा दी और बच्ची को बाहर निकाल लिया।

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    यह दो घटना तो बानगी मात्र हैं, सरकारी आंकड़ों के अनुसार दो वर्षों में खुले नालों में गिरकर 50 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से अधिक घायल हुए हैं। 2025 में ही अब तक खुले नाले में गिरने से अब तक 15 मौत हो चुकी हैं। दिल्ली में नजफगढ़, शाहदरा, बारापुला, सप्लीमेंट्री सहित 22 बड़े और 300 छोटे नाले हैं।

    राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस तरह की घटनाओं को मानवाधिकार उल्लंघन का मामला माना, जबकि दिल्ली हाईकोर्ट ने खुले नालों पर दिल्ली सरकार और एमसीडी से जवाब तलब करते हुए सख्ती बरतने के आदेश दिए।

    इतना होने के बाद दिल्ली सरकार चेती, उसने नालों की स्थिति जानने को ड्रोन सर्वे करने के आदेश दिए हैं ताकि खतरनाक खुले नालों को सुरक्षित बनाया जा सके।

    यहां है खतरनाक स्थिति

    • नजफगढ़ नाला कई हिस्सों में खुला है और यहां फेंसिंग नहीं है। पांच अगस्त 2025 को पांच वर्षीय बच्चा पतंग के पीछे भागते हुए कीचड़ भरे ओपन ड्रेन में गिरा और उसकी मौत हो गई। सात अगस्त को आठ वर्षीय बच्चा ओपन ड्रेन में गिरा और अस्पताल में मृत्यु हो गई।
    • वेलकम (लकड़ी मार्केट पुलिया), उत्तर-पूर्व दिल्ली, स्थानीय खुला नाला, पुलिया के पास खुले सेक्शन, गैर सुरक्षित किनारे।
    • खेड़ा खुर्द–फुर्नी रोड, नरेला नाले  में बरसात में पानी भरने से इसके खुला होने का पता नहीं लगता, ग्रिल-बैरिकेड भी नहीं है। नौ-10 अगस्त को ढाई वर्ष बच्चे की गिरने से मौत।
    • राजोकरी गांव, साउथ-वेस्ट दिल्ली (एमसीडी स्कूल के पास) नाला, सीवर-चैंबर/मैनहोल (साइड से खुला) बैरिकेडिंग/ग्रिल नहीं। यहां एक अगस्त को बच्चा खुले सीवर में गिरा और उसके किसी तरह बाहर निकाला जा सका।
    • महेन्द्रा पार्क–भरोला नाले के किनारों पर ग्रिल/फेंसिंग नहीं है, भीड़ भरे इलाके में खुला सेक्शन है। यहां पर सात जुलाई को चार वर्षीय बच्चे की खुले नाले में गिरने से मौत हो गई थी। 
    • खजूरी खास नाला का सेक्शन खुला है और सुरक्षा नहीं है। यहां 21 मार्च 2025 को तीन वर्षीय बच्चे की खुले नाले में गिरकर मौत हो गई थी।

    ‘बजट में नालों की मरम्मत और सुरक्षा संरचनाओं के लिए अलग से पर्याप्त धनराशि का प्रावधान अक्सर नहीं होता, इसके अलावा विभागों में तालमेल की कमी भी इन्हें असुरक्षित बना रही है। बरसात में मौसम में ये छोटे-बड़े नाले और भी खतरनाक हो जाते हैं, बार-बार हो रहे हादसे चेतावनी दे रहे हैं, लेकिन हमारी व्यवस्था की नींद नहीं टूट रही।’

    जेपी वर्मा, पूर्व अधिशासी अभियंता, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी)

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