नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। नगर निगम चुनाव (Delhi MCD Election 2022) के परिणाम आ चुके हैं, लेकिन नियमों की बाधा के चलते महापौर  की ताजपोशी के लिए अभी अप्रैल  तक इंतजार करना पड़ सकता है।  यह बाधा दूर करने के लिए निगम  के एक्ट में बदलाव करना होगा या  फिर गृह मंत्रालय से अनुमति लेनी  होगी, यानी फिलहाल महापौर चुनाव  को लेकर गेंद केंद्र सरकार के पाले में है।

अप्रैल में होगी सदस्यों की पहल बैठक

निगम में मुख्य विधि  अधिकारी रहे अनिल कुमार के मुताबिक दिल्ली नगर निगम एक्ट के अनुच्छेद 35 में स्पष्ट है कि महापौर और उपमहापौर का चुनाव  हर वर्ष होगा, जो कि एक अप्रैल से शुरू होगा। ऐसे में वर्तमान परिस्थिति में तो निर्वाचित होकर आए सदस्यों की पहली बैठक तो अप्रैल में ही होना संभव है।

हालांकि, तीनों निगमों को एक करने के बाद एक्ट में संशोधन किया गया है। इसमें यह प्रविधान है कि एक्ट को लागू करने में अगर कोई भी दिक्कत आती है, तो केंद्र सरकार एक आदेश निकालकर उसे दूर कर सकती है। इसके लिए एक्ट में संशोधन की आवश्यकता नहीं होगी। दो साल तक केंद्र सरकार के पास यह शक्ति है। हालांकि, इन आदेशों को लोकसभा और राज्यसभा में पेश करना होगा।

अब इस तरह आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

राज्य चुनाव आयोग जीते हुए प्रत्याशियों की अधिसूचना जारी करके निगम आयुक्त को भेजेगा। इस सूची के साथ निगम सचिव एक पत्र उपराज्यपाल को लिखेंगे। इसमें सदस्यों की बैठक की तारीख तय करने और महापौर का चुनाव कराने के लिए पीठासीन अधिकारी नियुक्त करने का अनुरोध किया जाएगा। इसके बाद उपराज्यपाल एक्ट के मुताबिक केंद्र सरकार से सलाह लेकर आगे निर्णय ले सकेंगे।

चुनाव में ये करेंगे मतदान

दिल्ली नगर निगम के महापौर का चुनाव में निर्वाचित 250 पार्षदों के साथ ही 13 विधायक सात दिल्ली के लोकसभा सांसद, तीन राज्यसभा सदस्य मतदान कर सकते हैं। जिसके पास बहुतम होता हैं वहीं, जीत जाता है। यहां बता दें कि मनोनीत दस सदस्यों को इसमें मतदान का अधिकार नहीं होता है।

पार्षदों की बैठक से पहले जारी होगी नामांकन के लिए तारीख

उपराज्यपाल जब भी सदन बुलाने की तारीख बताएंगे। उससे कम से कम दस दिन पूर्व निगम सचिव कार्यालय महापौर और उपमहापौर पद के प्रत्याशियों के नामांकन की तारीखों की घोषणा करेगा। कोई भी सदस्य नामांकन करने के बाद चुनाव होने से पहले तक

मनोनीत सदस्यों को नहीं है मतदान का अधिकारी

25 वर्ष से अधिक आयु के विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ दस सदस्यों को उपराज्यपाल मनोनीत करते हैं। इन सदस्यों को सदन में महापौर चुनाव से लेकर निगम के किसी भी मुद्दे पर मतदान का अधिकार नहीं होता है, जबकि वार्ड कमेटी में यह सदस्य मतदान कर सकते हैं। 2017-2022 के कार्याकाल में मनोनीत सदस्य स्थायी समिति के उपाध्यक्ष तक रहे हैं।

विधायक ऐसे बनते हैं सदस्य

दिल्ली विधानसभा के कुल सदस्यों का पांचवे हिस्से के बराबर सदस्य दिल्ली नगर निगम के सदस्य बनाए जाते हैं। इनकी नियुक्ति विधानसभा अध्यक्ष करते हैं। निगम क्षेत्र में 68 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। ऐसे में 13 सदस्य पूर्व में निगम के सदस्य रहे हैं। इन सदस्यों को महापौर और उपमहापौर के चुनाव में मतदान करने का अधिकार होता है।

उपराज्यपाल जारी करते हैं सदस्यों की अधिसूचना

निगम चुनाव के बाद उपराज्यपाल दिल्ली के सात लोकसभा क्षेत्रों के सदस्यों को निगम सदस्य नियुक्त करते हैं। इसी प्रकार राज्यसभा सदस्यों को सदस्य घोषित किया जाता है। इसकी घोषणा उपराज्यपाल अधिसूचना जारी करके करते हैं।

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Edited By: Abhi Malviya

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