नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। Delhi MCD Election 2022: कम मतदान होने के मायने क्या इस पर अब भी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता, क्योंकि कई ऐसे उदाहरण है कि मतदान का प्रतिशत कम होने के बाद भी सत्तारुढ़ दल ने वापसी की है जबकि कुछ मामलों में सत्ता परिवर्तन हो गया है।

ऐसे किसी निष्कर्ष पर पहुंचना गलत होगा। हालांकि यह जरुर कहा जा सकता है कि मतदान का प्रतिशत कम होने के पीछे भी वह मतदाता भी आगे नहीं आए जो कि प्रत्याशियों की जीत हार को तय करते हैं। ऐसे में प्रत्याशियों में जीत और हार का आंकड़ा बहुत नजदीक का हो सकता है।

संभव है कि 100 या दौ सौ या फिर 1000 मतों के अंतर से जीत हार तय हो। चूंकि प्रत्याशियों की भी संख्या ज्यादा नहीं थी ऐसे में कई सीटों पर भाजपा और आप का कड़ा मुकबला देखा गया है। यह परिणाम में कितना परिवर्तित होता है सात दिसंबर को मतगणना से पता चल जाएगा।

'मतदान के प्रतिशत से किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं'

मतदान प्रतिशत कम रहने के मायने का विश्वलेषण करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर संगीत रागी कहते हैं कि मतदान के प्रतिशत से किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं है, क्योंकि कई बार कम मतदान सत्तारुढ़ दल की वापसी कराता है तो कई मामलों में यह परिवर्तन भी करा देता है।

ऐसे में यह कहना कि इससे भाजपा या आम आदमी पार्टी (आप) को लाभ होगा यह सही नहीं होगा। हां कम मतदान का मतलब यह है कि दिल्ली नगर निगम के चुनाव में दिल्ली के मतदाता रुचि नहीं दिखा रहे हैं। जबकि जमीनी मुद्दों के लिए तो यही चुनाव काम करता है। हालांकि बीते चुनावों में यह देखा गया है कि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में यही दिल्ली के मतदाता बढ़चढ़कर हिस्सा लेते हैं वहीं, मतदाता दिल्ली नगर निगम के चुनाव में इतनी रुचि नहीं लेते हैं।

2019 के चुनाव में दिल्ली में हुआ था 67.4 प्रतिशत मतदान

लोकसभा के 2014 के चुनाव में दिल्ली में 66.4 प्रतिशत तो 2019 में 67.4 प्रतिशत मतदान हुआ था। इसी प्रकार वर्ष 2015 के निगम विधानसभा चुनाव में 67.13 प्रतिशत तो 2020 में 62.59 प्रतिशत मतदान हुआ था।बाक्स 43 प्रतिशत मतदान पर भी हो गया था सत्ता परिवर्तनदिल्ली नगर निगम के चुनाव में कम मतदान का कोई मायना लगाना उचित नहीं होगा, क्योंकि 2002 के चुनाव में जिस कांग्रेस ने 134 में से 108 सीटों जीत दर्ज की थी वहीं, कांग्रेस 2007 के चुनाव में हार गई थी। जबकि मतदान का प्रतिशत मात्र 43.24 प्रतिशत रहा था।

2007 के चुनाव में 272 सीटों में से भाजपा को 164 सीटें मिली थी जबकि कांग्रेस को मात्र 67 सीटें मिली थी। वर्ष 2012 में तमदान का प्रतिशतल 10 प्रतिशत बढ़ा बावजूद इसके सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ। 2012 के निगम चुनाव में भाजपा को 272 में से 136 सीटों पर जीत मिली थी। इसी प्रकार 53.55 प्रतिशत का मतदान प्रतिशत होने के बाद भाजपा 272 में से 181 सीटों पर विजयी रही।

दिल्ली नगर निगम

वर्ष - मतदान प्रतिशत

2007- 43.24

2012- 53.39

2017- 53.55

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Edited By: Abhishek Tiwari

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