Delhi: कूड़े के पहाड़ों पर राजनीति की नहीं, खत्म करने की जरूरत: एलजी, बोले- दिल्ली के लिए बहुत कुछ करना बाकी
उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने कहा कि कूड़े के पहाड़ों पर भी राजनीति की नहीं उन्हें खत्म करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि उनके एलजी बनने से पहले लैंडफिल साइटों से कूड़ा हटाने के काम में केवल छह ट्रायल मशीनें लगी थीं जबकि आज 46 मशीनें लगी हैं।
नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना अपने पांच माह के कार्यकाल से बहुत संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि पांच माह अच्छे रहे, लेकिन जो कुछ भी कर पाया हूं, वह ज्यादा नहीं है। अभी दिल्ली के लिए बहुत कुछ करना शेष है। दिल्ली को सही मायनों में देश की राजधानी बनाना है। इसी साल 26 मई को दिल्ली के उपराज्यपाल का पद संभालने के बाद बृहस्पतिवार शाम वीके सक्सेना ने राजधानी के चुनिंदा पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत की।
उन्होंने कहा कि कूड़े के पहाड़ों पर भी राजनीति की नहीं, उन्हें खत्म करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि उनके एलजी बनने से पहले लैंडफिल साइटों से कूड़ा हटाने के काम में केवल छह ट्रायल मशीनें लगी थीं, जबकि आज 46 मशीनें लगी हैं। कुछ दिन में 40 मशीनें और आएंगी। इन मशीनों की संख्या 100 तक ले जाई जाएगी।
ऊंची इमारतों पर लगाई जाएगी एंटी स्माग गन
उन्होंने कहा कि कूड़े के पहाड़ खत्म भी होंगे और बहुत जल्द इसका असर भी दिखने लगेगा। दिल्ली में वायु प्रदूषण के बिगड़ते हालात पर उन्होंने दावा किया कि इस साल पिछले वर्षों के मुकाबले स्थिति में सुधार होगा। 125 जगह चिह्नित कर ली गई हैं। ऊंची-ऊंची इमारतों पर एंटी स्माग गन तैनात की जाएंगी। उन्होंने कहा कि जमीन पर पानी का छिड़काव करने से उतना फायदा नहीं होता, जितना ऊपर से पानी का छिड़काव करने पर होगा।
धूल रोकने के लिए हटाए जाएंगी सड़कों से गड्ढे
एलजी ने कहा कि धूल प्रदूषण की रोकथाम के लिए नगर निगम ने 15 अक्टूबर से अभियान शुरू कर दिया है। इस दौरान पांच सौ वर्ग मीटर से ज्यादा के निर्माण और ध्वस्तीकरण स्थलों के अनिवार्य पंजीकरण पर भी जोर दिया जा रहा है। यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि फुटपाथ और सड़क के बीच की सेंट्रल वर्ज पर हरियाली की जाए एवं सड़कों पर गड्ढे न हों, ताकि धूल को उड़ने से रोका जा सके।
सार्वजनिक परिवहन का होना चाहिए विस्तार
एलजी ने स्वीकार किया कि दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन का विस्तार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन के बेहतर होने पर ही लोग निजी वाहनों का प्रयोग कम करेंगे। इससे यातायात एवं प्रदूषण दोनों में कमी आएगी। उन्होंने कहा कि इस दिशा में काम चल रहा है। कोशिश यही है कि सब कुछ नियम-कानून के दायरे में हो।
आरोपों पर कहा- सकारात्मक सोच
दिल्ली सरकार के कामकाज में रुकावट डालने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि वह सकारात्मक सोच के साथ काम कर रहे हैं। उनकी कोशिश यही है कि सब कुछ नियम-कानून के दायरे में हो। यह पूछने पर कि व्यक्तिगत आरोप लगने पर क्या उनका मनोबल कम नहीं हुआ? उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है। मुझे इस सबसे कोई फर्क नहीं पड़ा। अब तो हाई कोर्ट में भी वह मामला खत्म हो गया है।
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