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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 19, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

'महज धमकी देना अपराध नहीं, डर पैदा करने की मंशा जरूरी', यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी

Published: Sat, 19 Jul 2025 08:38 PM (GMT+05:30)

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ धमकी देना आपराधिक भय नहीं है जब तक कि उसका उद्देश्य डर ...और पढ़ें

महज धमकी देना अपराध नहीं, डर पैदा करने की मंशा जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट
महज धमकी देना अपराध नहीं, डर पैदा करने की मंशा जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट

HighLights

  1. हाईकोर्ट धमकी, डर पैदा करना मकसद नहीं, तो अपराध नहीं |
  2. पुलिस की अपील खारिज, निचली अदालत का फैसला बरकरार |
  3. नाबालिग यौन उत्पीड़न मामले में आरोपित दोषमुक्त |

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल धमकी देना, यदि उसका उद्देश्य डर पैदा करना न हो, तो वह आपराधिक भय उत्पन्न करने का अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की धारा 506 के तहत अपराध तभी सिद्ध होता है जब आरोपित की धमकी से पीड़ित को वास्तव में डर लगे।

न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने यह टिप्पणी दिल्ली पुलिस की उस अपील को खारिज करते हुए की, जिसमें एक व्यक्ति को आइपीसी की धारा 451 (गैरकानूनी रूप से घर में प्रवेश) और 506 (आपराधिक धमकी) व पाक्सो एक्ट की धारा आठ के तहत दोषमुक्त किए जाने को चुनौती दी गई थी। यह मामला वर्ष 2013 का था, जिसमें आरोप था कि आरोपित ने एक नाबालिग लड़की के घर में घुसकर उसके साथ यौन उत्पीड़न किया था।

उसकी कहानी की विश्वसनीयता पर संदेह उत्पन्न हुआ

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि पीड़िता की गवाही में कई विरोधाभास और बदलाव थे जिससे उसकी कहानी की विश्वसनीयता पर संदेह उत्पन्न हुआ। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि आरोपित ने नाबालिग को डराने की मंशा से धमकी दी था। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि पीड़िता ने खुद दरवाजा खोला और तुरंत आरोपित को धक्का देकर बाहर निकल गई, तो आरोपित के पास धमकी देने का समय ही नहीं था।

यह मामला वर्ष 2013 में दर्ज हुआ था, जिसमें आरोप था कि एक व्यक्ति ने 14 वर्षीय नाबालिग लड़की के घर में घुसकर उसके साथ यौन उत्पीड़न किया था।