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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 24, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ध्वस्त कर दोबारा बनाया जाएगा सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट, मकान मालिकों को दो कैटेगरी में 50 और 38 हजार मिलेगा किराया

Published: Tue, 24 Dec 2024 07:49 AM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट ने मुखर्जी नगर के सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट को खतरनाक घोषित करने के फैसले को बरकरार रखा और ...और पढ़ें

सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट। फोटो सौ.- जागरण आर्काइव
सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट। फोटो सौ.- जागरण आर्काइव

HighLights

  1. सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट को खतरनाक घोषित करने के निर्णय को हाई कोर्ट ने रखा बरकरार
  2. दिल्ली विकास प्राधिकरण को इमारत गिराकर दोबारा निर्माण करने का दिया आदेश
  3. हाई कोर्ट ने कहा- अपार्टमेंट निवासी भवन का कब्जा मिलने तक किराया पाने के हकदार

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। मुखर्जी नगर के बहुमंजिला सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट को खतरनाक घोषित करने के दिल्ली नगर निगम के निर्णय को हाई कोर्ट ने बरकरार रखा है। साथ ही हाई कोर्ट ने सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट बनाने वाले दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को इमारत को गिराकर दोबारा निर्माण करने का आदेश दिया है। अदालत ने अब भी अपार्टमेंट में रहने वाले निवासियों को एक महीने में भवन खाली करने का आदेश दिया है।

मकान मालिकों को मिलेगा किराया

साथ ही डीडीए को आदेश दिया कि भवन खाली करने की तारीख से एचआइजी भवन मालिकों को 50 हजार रुपये प्रतिमाह और एमआइजी भवन मालिकों को 38 हजार रुपये प्रतिमाह किराया दिया जाए। न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा की पीठ ने यह भी आदेश दिया कि जब तक कि भवन मालिकों को भवन निर्माण कर कब्जा नहीं दिया जाता है, डीडीए प्रतिवर्ष के अंत में किराए में 10 प्रतिशत की वृद्धि करेगा।

घर का मालिक किराया पाने के हकदार

अदालत ने कहा कि सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट के निवासी पहले से ही ऐसी परिस्थितियों से पीड़ित हैं, जिसके लिए वह जिम्मेदार नहीं हैं और जो उनके नियंत्रण से बाहर हैं। डीडीए ने माना है कि उक्त संरचनाएं खतरनाक हैं और इसे ध्वस्त करके पुनर्निर्माण करना है। पुनर्निर्मित फ्लैटों का कब्जा उचित तरीके से सौंपे जाने तक निवासियों का पुनर्वास सुनिश्चित करना डीडीए का कर्तव्य है।

कोर्ट ने कहा ऐसे में अपार्टमेंट निवासी भवन का कब्जा मिलने तक किराया पाने के हकदार हैं। यह भी स्पष्ट किया कि जबकि इमारत को खतरनाक घोषित किया जा चुका है, ऐसे में भवन मालिकों से अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उक्त संरचना को ध्वस्त करने के लिए अपेक्षित कार्रवाई करना एजेंसी का वैधानिक कर्तव्य है।

दोबारा

डीडीए ने सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट के ध्वस्तीकरण के साथ दोबारा बनाए जाने के क्रम में 168 अतिरिक्त फ्लैट बनाए जाने की बात कही थी। मगर, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई अतिरिक्त भवन नहीं बनेगा। कोर्ट ने कहा कि अतिरिक भवन बनने से वर्तमान के भवन मालिकों को असुविधा नहीं होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि भवन मालिकों को जो सुविधा पहले दी गई थी, वही सुविधा दोबारा बरकरार रखी जाए।

क्या है मामला?

डीडीए ने 2010 में मुखर्जी नगर में सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट में 336 एचआइजी और एमआइजी फ्लैट का निर्माण कर आवंटन किया था। जून 2012 में इन फ्लैटों का आवेदकों को कब्जा मिला, लेकिन जल्द ही अधिकांश फ्लैटों की छत से प्लास्टर झड़ने लगा और दीवारों में दरारें आ गईं। इसकी शिकायत मिलने पर डीडीए ने 2015-16 में फ्लैटों की मरम्मत कराई।

मगर इनमें जगह-जगह दरारें आने पर आइआइटी और सीमेंट कंपनी ने इस अपार्टमेंट की जांच की। जांच में इन फ्लैटों के निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल पाया गया। सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट को ध्वस्त कर दोबारा बनाने का निर्णय लिया गया। डीडीए ने कोट में कहा था कि वह इस सोसायटी में खाली पड़ी जमीन पर 168 अतिरिक्त फ्लैट बनाएगा, ताकि दोबारा फ्लैट बनाकर देने के खर्च की पूर्ति की जा सके।