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    Udaipur Files: दिल्ली हाई कोर्ट का फिल्म पर रोक लगाने की मांग करने वालों के लिए स्क्रीनिंग का आदेश

    Updated: Wed, 09 Jul 2025 06:29 PM (IST)

    जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने उदयपुर फाइल्स पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर की जबकि सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म की स्क्रीनिंग का आदेश दिया क्योंकि निर्माताओं ने आपत्तिजनक अंश हटाने की बात कही। याचिकाकर्ता का आरोप है कि फिल्म सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ सकती है। फिल्म नुपुर शर्मा के विवादित बयान को भी बढ़ा-चढ़ाकर दिखाती है जिससे पहले अशांति हुई थी।

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    हाई कोर्ट ने कहा- विरोध करने वालों के लिए की जाएगी फिल्म की स्क्रीनिंग।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली:  फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वालों के लिए फिल्म की स्क्रीनिंग की व्यवस्था करने का दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को निर्देश दिया।

    अदालत ने यह आदेश तब दिया जब केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) और फिल्म निर्माताओं ने पीठ को सूचित किया कि फिल्म से आपत्तिजनक अंश हटा दिए गए हैं।

    फिल्म के रिलीज पर रोक की मांग को लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने याचिका दायर की है। दूसरी तरफ फिल्म स्क्रीनिंग को चुनौती देने के मामले में आरोपित मोहम्मद जावेद की याचिका पर को तल्काल लिस्ट करने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया।

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    फिल्म निर्माताओं के वकील ने स्क्रीनिंग पर जताई आपत्ति

    मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति अनीश दयाल की पीठ ने फिल्म निर्माता को अरशद मदनी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और सेंसर बोर्ड की तरफ पेश हुए अतिरिक्त सालिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा के लिए फिल्म और ट्रेलर की स्क्रीनिंग की व्यवस्था करने का निर्देश दिया।

    अदालत ने कहा कि मामले में फिल्म के तथ्याें का परीक्षण करें। साथ ही मामले को गुरुवार के लिए तय कर दिया। सुनवाई के दौरान फिल्म निर्माताओं के वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता स्क्रीनिंग के बाद फिर से आपत्तियां उठाएंगे।

    इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए पीठ ने कहा कि क्या फिल्म की स्क्रीनिंग से फिल्म के प्रमाणपत्र को चुनौती देने का याची का अधिकार छिन सकता है?

    वकील ने कहा- पहले ही दृश्यों को हटा लिया गया है

    मदनी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुरक्षित है, लेकिन फिल्म का उद्देश्य सांप्रदायिक वैमनस्य को बढ़ावा देना प्रतीत होता है।

    वहीं, सेंसर बोर्ड की तरफ से पेश हुए एएसजी चेतन शर्मा ने जवाब दिया कि सेंसर बोर्ड ने पहले ही चिह्नित सामग्री को हटा दिया है। 11 जुलाई को रिलीज होने वाली फिल्म के रिलीज, वितरण, प्रसारण या सार्वजनिक प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की है।