यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 03, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को सब्सिडी में तेजी लाने का दिया निर्देश, इलेक्ट्रिक वाहन ग्राहकों को मिलेगी राहत
दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को इलेक्ट्रिक वाहन सब्सिडी के वितरण में तेजी लाने का आदेश दिया है। अदालत ...और पढ़ें

HighLights
- उच्च न्यायालय का सब्सिडी वितरण का आदेश
- इलेक्ट्रिक वाहन ग्राहकों को राहत
- सरकार को प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले ग्राहकों को वादा की गई सब्सिडी वितरित करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आदेश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा कि सरकार इस तथ्य की आड़ नहीं ले सकती कि दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2020 में राशि वितरित करने के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है।
न्यायालय ने कहा कि सरकार के पास धनराशि होने के बावजूद, प्रक्रियागत मुद्दों के कारण वितरण में देरी हो रही है। न्यायालय ने दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग को सब्सिडी राशि के वितरण के लिए शीघ्र एक समर्पित बैंक खाता स्थापित करने का आदेश दिया।
पीठ ने यह आदेश जन सेवा वेलफेयर सोसाइटी नामक एक संस्था द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में चिंता व्यक्त की गई थी कि दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले कई लोगों को अभी तक सब्सिडी राशि नहीं मिली है।
इसमें यह भी कहा गया है कि 2020 की ईवी नीति दिल्ली में खरीदे जाने वाले नए वाहनों में से 25 प्रतिशत ईवी सुनिश्चित करने के अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए कई वित्तीय प्रोत्साहनों के साथ सब्सिडी प्रदान करती है।
बुधवार को सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि जब कोई व्यक्ति इलेक्ट्रिक वाहन खरीदता है, तो वह डीलर को पूरी राशि चुकाता है, लेकिन बाद में सब्सिडी खरीदार को वापस कर दी जाती है।
हालाँकि, सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत दिल्ली सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली सरकार द्वारा अभी भी 48 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी वितरित की जानी बाकी है।
इसी समय, दिल्ली सरकार के वकील ने पीठ को बताया कि 78 हज़ार से अधिक लाभार्थियों को 179 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी मिल चुकी है और देरी की समस्या को दूर करने के लिए एक समर्पित बैंक खाता खोला जा रहा है।
मामले पर विचार करने के बाद, पीठ ने कहा कि आवश्यक विभागों से अनुमति प्राप्त करने के बाद तुरंत खाता खोला जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि अदालत को उम्मीद है कि प्रक्रियात्मक देरी तुरंत दूर हो जाएगी और नया बैंक खाता खोलकर भुगतान शीघ्रता से किया जाएगा।
