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    इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाएं केजरीवाल की सुनवाई का वीडियो: दिल्ली हाईकोर्ट

    Updated: Sat, 15 Jun 2024 04:45 PM (IST)

    हाईकोर्ट ने विभिन्न इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म को अरविंद केजरीवाल की अदालती कार्यवाही से जुड़ी वीडियो और आडियो को हटाने का निर्देश दिया। आबकारी घोटाले में ईडी द्वारा गिरफ्तार केजरीवाल वीडियो में व्यक्तिगत रूप से अदालत को संबोधित करते हुए दिख रहे हैं। पीठ ने केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल और कई अन्य के खिलाफ वीडियो कांफ्रेंसिंग नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में एक जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया।

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    सुनीता केजरीवाल को हाईकोर्ट ने दिया वीडियो हटाने का निर्देश।

    रीतिका मिश्रा, नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने विभिन्न इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अदालती कार्यवाही से जुड़ी वीडियो और आडियो को हटाने का निर्देश दिया। आबकारी घोटाले में ईडी द्वारा गिरफ्तार केजरीवाल वीडियो में व्यक्तिगत रूप से अदालत को संबोधित करते हुए दिख रहे हैं।

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    न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा और न्यायमूर्ति अमित शर्मा की पीठ ने केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल और कई अन्य के खिलाफ वीडियो कांफ्रेंसिंग नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में एक जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया। जनहित याचिका अधिवक्ता वैभव सिंह ने दायर की है।

    उन्होंने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री की पत्नी और अन्य लोग जिसमें अक्षय मल्होत्रा, एक्स (पहले ट्वीटर) यूजर नागरिक-इंडिया जीतेगा, प्रोमिला गुप्ता, विनीता जैन और डा. अरुणेश कुमार यादव ने जानबूझकर दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा अधिसूचित वीडियो कांफ्रेंसिंग नियमों का उल्लंघन किया है।

    अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया अदालती कार्यवाही की रिकॉर्डिंग दिल्ली हाईकोर्ट वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम, 2021 का उल्लंघन है और इसे सार्वजनिक डोमेन में रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

    अदालत ने कहा इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर), मेटा (पहले फेसबुक), इंस्टाग्राम और यूट्यूब को अपने-अपने प्लेटफॉर्म से आडियो व वीडियो रिकार्डिंग को तुरंत हटाने का निर्देश दिया है। अदालत ने इन प्लेटफॉर्म को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि अगले आदेश तक आडियो या वीडियो उनके प्लेटफॉर्म पर दोबारा अपलोड न हों। इस मामले की सुनवाई अब नौ जुलाई को होगी।

    याचिका में आरोपितों के खिलाफ जांच और प्राथमिकी दर्ज करने के लिए एसआइटी के गठन की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा कि आरोपितों ने अदालती कार्यवाही के आडियो और वीडियो को रिकार्ड करने और साझा करने की साजिश रची और ट्रायल कोर्ट के न्यायाधीश की जान को जोखिम में डाला।

    याचिकाकर्ता ने कहा कि आम आदमी पार्टी (AAP) के कई सदस्यों सहित कई अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने जानबूझकर अदालत की कार्यवाही को बदनाम करने और उसमें हेरफेर करने के इरादे से अदालत की कार्यवाही की आडियो और वीडियो रिकार्डिंग की और उसे इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया।

    इसके अलावा, याचिका में इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म को इस तरह की अनधिकृत रिकार्डिंग की पुनरावृत्ति और उसके बाद उनके प्रसार को रोकने के लिए निर्देश जारी करने और किसी भी व्यक्ति या संस्था पर निर्देशों का पालन न करने के लिए दंड लगाने की भी मांग की गई है।