Delhi High Court: संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने वालों की जमानत याचिका का दिल्ली पुलिस ने किया विरोध
दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में संसद सुरक्षा में सेंधमारी मामले के आरोपितों की जमानत याचिका का विरोध किया। अदालत को बताया गया कि आरोपित नीलम आजाद और महेश कुमावत को गिरफ्तारी का आधार बताया गया था। अदालत ने पुलिस की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली: संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने के आरोपितों की जमानत याचिका का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस ने बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि आरोपितों नीलम आजाद और महेश कुमावत को गिरफ्तारी का आधार बताया गया था।
दिल्ली पुलिस के वकील ने कहा कि केस डायरी, गिरफ्तारी मेमो, रिमांड आवेदन और ट्रायल कोर्ट के आदेश में दर्ज किए गए आधार दोनों को बताए गए थे। मंगलवार को मामले में हाई कोर्ट ने निर्णय सुरक्षित रखा था, हालांकि, गिरफ्तारी के आधार को लेकर आगे की सुनवाई की गई।
पुलिस की दलील सुनने के बाद न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद व न्यायमूर्ति हरीश वैधनाथन शंकर की पीठ ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया।
तर्क दिया, मीडिया ने आतंकी हमले के बजाय सुरक्षा में सेंध बताया
सुनवाई के दौरान नीलम की तरफ से पेश हुए वकील ने तर्क दिया कि मामले को कवर करने वाले सभी मीडिया इसे आतंकी हमले के बजाय संसद की सुरक्षा भंग करना बताया था। यह भी कहा कि आरोपितों ने कोई आतंकी कृत्य नहीं किया है और न ही उनका व्यवहार व शिक्षा ऐसी है।
पीठ ने कहा कि अदालत खबरों में लिखी बातों से नहीं चलती। मंगलवार को निर्णय सुरक्षित रखते हुए अदालत ने पूछा था कि संसद हमले की बरसी की तारीख व स्थान ही प्रदर्शन के लिए क्यों चुना ?
गौरतलब है कि 13 मई 2023 को संसद भवन के अंदर व बाहर हुए प्रदर्शन के बाद आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था और ट्रायल कोर्ट ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था। इस निर्णय को आरोपितों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
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