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    दिल्ली सरकार शुरू कर रही विरासत बचाओं योजना, शहर के स्मारकों को लिया जाएगा गोद

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 08:23 AM (IST)

    दिल्ली सरकार विरासत अपनाओ योजना शुरू करने जा रही है जिसका उद्देश्य स्मारकों के संरक्षण में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना है। इसके तहत स्मारकों को स्मारक मित्र के रूप में अपनाया जाएगा। सरकार 75 स्मारकों का जीर्णोद्धार कर रही है ताकि दिल्ली की ऐतिहासिक धरोहरों को सुंदर और जीवंत बनाया जा सके।

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    दिल्ली सरकार विरासत अपनाओ योजना शुरू करने जा रही है। फाइल फोटो

    राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। पुरातत्व विभाग जल्द ही "एक विरासत अपनाओ" योजना शुरू करने जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य विरासत संरक्षण में सार्वजनिक, निजी क्षेत्र और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

    साथ ही, समग्र पर्यटन अनुभव को बढ़ाना और शहर भर में दिल्ली के कम प्रसिद्ध स्मारकों के आसपास आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। इस योजना का मुख्य फोकस आगंतुकों/पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने पर है, जिसके तहत शुरुआत में पांच वर्षों की अवधि के लिए स्मारकों को "स्मारक मित्र" के रूप में अपनाने की योजना है, जिसकी समय-समय पर समीक्षा भी की जाएगी।

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    इस योजना पर, दिल्ली सरकार के पुरातत्व विभाग द्वारा शुक्रवार को दिल्ली सचिवालय में एक गोलमेज सम्मेलन का भी आयोजन किया गया ताकि दिल्ली शहर के स्मारकों को कॉर्पोरेट्स के सहयोग से सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बनाया जा सके और उन्हें बुनियादी ढांचे से सुसज्जित किया जा सके।

    इस आयोजन में यूनेस्को, डालमिया समूह का सभ्यता फाउंडेशन, आगा खान ट्रस्ट, काकिनी, इंटेक दिल्ली चैप्टर, धारताल, आर्किटेक्चरल स्टूडियो इंडिया, के-2 इंडिया, कॉस्मो, बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति आदि ने भाग लिया।

    दिल्ली के कला एवं संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि ये सभी स्मारक 8वीं शताब्दी से 19वीं शताब्दी तक की ऐतिहासिक धरोहरों को संजोए हुए हैं और अपनी वास्तुकला एवं स्थापत्य कला के कारण विशिष्ट पहचान रखते हैं।

    इनमें प्रमुख हैं - भूली भटियारी का महल, मालचा महल, बारादरी, दारा शिकोह पुस्तकालय, बारा लव का गुंबद, गोल गुंबद, हस्तसाल मीनार, कोस मीनार, बवाना जेल, शहीद स्मारक, कुली खां स्मारक।

    संगठनों के प्रतिनिधियों से विचार आमंत्रित किए गए हैं। दिल्ली के कम प्रसिद्ध स्मारकों को भी रोशन करने की आवश्यकता है, ताकि उनके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को पहचाना जा सके। साथ ही, इस सूची में और भी स्मारकों को शामिल किया जा सकता है, ताकि दिल्लीवासियों को अपनी विरासत से और गहराई से जुड़ने का अवसर मिले।

    मिश्रा ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार के पास कई ऐतिहासिक स्मारक हैं, जिनका वर्षों से रखरखाव नहीं किया गया और जिनकी उपेक्षा की गई। हमने इनमें से लगभग 75 का जीर्णोद्धार और संरक्षण किया है।

    अब हमारा उद्देश्य इसमें सामाजिक भागीदारी लाना है, ताकि दिल्ली के इन धरोहरों को और अधिक सुंदर, सुलभ और जीवंत बनाया जा सके। सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों के साथ-साथ दिल्ली के कलाकारों और कलाकारों को भी यहां एक मंच मिलेगा।