यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 30, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Delhi: जींस की रंगाई-धुलाई से यमुना और पर्यावरण को कितना हो रहा नुकसान? दिल्ली सरकार करेगी अध्ययन
दिल्ली सरकार ने यमुना के प्रदूषण को कम करने के लिए एक कदम उठाया है। सरकार कपड़ों की रंगाई या ...और पढ़ें

नई दिल्ली, पीटीआई। दिल्ली सरकार ने यमुना के प्रदूषण को कम करने के लिए एक कदम उठाया है। सरकार कपड़ों की रंगाई या धुलाई और धातु की सतह के उपचार की गतिविधियों जैसे इलेक्ट्रोप्लेटिंग और फॉस्फेटिंग में लगी इकाइयों के पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन करेगी। अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली में गैर-अनुरूप और आवासीय क्षेत्रों में काम करने वाली ऐसी लघु इकाइयों से निकलने वाला कचरा सीधे यमुना में प्रवाहित होता है, जिससे इसका प्रदूषण भार बढ़ जाता है।
इनमें से अधिकांश इकाइयां बिना अनुमति और अपशिष्ट उपचार संयंत्रों के संचालित होती हैं। उनके अपशिष्टों में अमोनिया और फॉस्फेट की उच्च सांद्रता होती है, जो नदी के पानी पर घने झाग के प्राथमिक कारणों में से एक है।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने इस संबंध में शैक्षणिक संस्थानों से 28 फरवरी तक प्रस्ताव मांगे हैं। डीपीसीसी की वेबसाइट पर एक नोटिस के मुताबिक, अध्ययन से पता चलेगा कि इन इकाइयों द्वारा कितना पानी इस्तेमाल किया जा रहा है और उनके क्षेत्रों में उपचार संयंत्रों और जल निकायों की क्षमता कितनी है।
जीन्स और अन्य कपड़ों की रंगाई या धुलाई या धातु की सतह के उपचार- इलेक्ट्रोप्लेटिंग, फॉस्फेटिंग और एनोडाइजिंग आदि जैसी गतिविधियों में पानी की भारी खपत और प्रदूषण की संभावना होती है। डीपीसीसी ने प्रदूषण की क्षमता और इसकी उपचार सुविधाओं, पर्यावरण पर प्रभाव और उपचारात्मक उपायों को जानने के लिए एक पर्यावरण अध्ययन करने का फैसला किया है।
ऐसी इकाइयों से निकलने वाले बहिस्राव कार्सिनोजेनिक रसायनों, रंगों और भारी धातुओं का मिश्रण होते हैं जो पीने के पानी के स्रोतों को भी प्रदूषित करते हैं।
