पर्यावरण की रक्षा के प्रति दिल्ली सरकार संवेदनहीन, स्वीकार करे पेड़ कटवाने का दोष: सुप्रीम कोर्ट
Supreme Court सुप्रीम कोर्ट ने कहा कहा कि दिल्ली सरकार ने पेड़ काटने का आदेश दिया है वह उसे स्वीकार करने का दोष ले। दक्षिणी रिज के आरक्षित वन क्षेत्र में सड़क बनाने के लिए पेड़ों को काटने की अनुमति देने पर कोर्ट ने फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार को पेड़ काटने का आदेश देने का कोई अधिकार नहीं है।
पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने दक्षिणी रिज के आरक्षित वन क्षेत्र में सड़क बनाने के लिए 422 पेड़ों को काटने की अनुमति देने पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए, DDA) को फटकार लगाते हुए कहा कि दिल्ली सरकार ने पर्यावरण की रक्षा के प्रति संवेदनहीनता दिखाई है।
जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि पेड़ अधिकारी द्वारा दिए गए बयान से पता चलता है कि 422 पेड़ों को काटने के लिए अधिकारी ने कोई अनुमति नहीं दी थी। सुप्रीम कोर्ट सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए रिज वन क्षेत्र में 1,100 पेड़ों को काटने के मामले में डीडीए के उपाध्यक्ष के खिलाफ स्वत संज्ञान लेते हुए शुरू की गई अवमानना कार्यवाही की सुनवाई कर रहा था।
दिल्ली सरकार ले दोष
पीठ ने 12 जुलाई को दिए आदेश में कहा था कि दिल्ली सरकार को 422 पेड़ों को काटने की अनुमति देने का दोष स्वीकार करना चाहिए। हालांकि, दिल्ली सरकार को ऐसी अनुमति देने का कोई अधिकार नहीं है। पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार को कोर्ट के सामने आकर बताना चाहिए कि वह अपने अवैध कृत्यों के कारण पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई कैसे करेगी।
पहले भी पेड़ काटने के दिए आदेश
उसने कहा कि दिल्ली सरकार के हलफनामे से पता चलता है कि यह एकमात्र मामला नहीं है, जहां दिल्ली सरकार के वन विभाग ने पेड़ों की कटाई की अनुमति दी है। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार को उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई रिपोर्ट भी पेश करनी चाहिए, जिन पर पेड़ों की कटाई की अनुमति देने का आरोप है।
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