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    Delhi Election 2025: चर्चा में दिल्ली की तीन सीटें, BJP और AAP के योद्धा भी 'कांग्रेसी'; दिलचस्प हैं समीकरण

    By Jagran NewsEdited By: Abhishek Tiwari
    Updated: Mon, 20 Jan 2025 08:07 AM (IST)

    Delhi Election 2025 के लिए पांच फरवरी को सभी 70 सीटों पर मतदान होगा। इस बीच दिल्ली की तीन सीटों (गांधीनगर सीलमपुर और सीमापुरी) चर्चा का क्रेंद्र बनी हुई हैं। इन तीनों सीटों पर भाजपा और आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस से आए नेताओं पर दांव चला है। इन सीटों पर जीत किसी प्रत्याशी की भी हो लेकिन विजेता कोई कांग्रेसी विचारधारा वाला ही होगा।

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    पिछले दो चुनाव से खाता नहीं खोल पाई कांग्रेस। फोटो सौ.- जागरण ग्राफिक्स

    स्वदेश कुमार, नई दिल्ली। दिल्ली की सत्ता पर लगातार 15 साल राज करने वाली कांग्रेस पिछले दो विधानसभा चुनाव से खाता नहीं खोल पा रही है। दोनों चुनाव में कांग्रेस की स्थिति ऐसी हो गई थी कि पार्टी की कहीं चर्चा तक नहीं हो रही थी, लेकिन इस बार चुनाव कांग्रेस की भी चर्चा है।

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    इस चर्चा की शुरुआत आप संयोजक अरविंद केजरीवाल के सामने पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित, मुख्यमंत्री आतिशी के सामने अलका लांबा और पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के समक्ष फरहाद सूरी को उतारे जाने के साथ हुई थी। इसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी का अरविंद केजरीवाल पर हमलावर रुख भी चर्चा का कारण बना।

    क्यों चर्चा में हैं तीन सीटें?

    खासकर तब जबकि सात महीने पहले दोनों आइएनडीआइए के बैनर तले दिल्ली में एक साथ आकर लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे। इन सबके बीच इस समय चर्चा के केंद्र में तीन सीटें हैं। क्योंकि इन तीनों सीटों पर कांग्रेस के साथ भाजपा और आप भी किसी ''कांग्रेसी'' के ही भरोसे है। यहां तीनों पार्टियों में जीत किसी के भी प्रत्याशी की हो पर विजेता कोई कांग्रेसी विचारधारा वाला ही होगा।

    कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए अरविंदर सिंह लवली

    दरअसल, गांधीनगर, सीलमपुर और सीमापुरी में कांग्रेस के उम्मीदवार तो मैदान में हैं ही। उनके सामने भाजपा और आप से उतरे प्रत्याशी भी कुछ समय पहले तक कांग्रेसी ही थे, जिन्होंने पाला बदलकर झंडा बदल लिया है। गांधीनगर में भाजपा ने कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और शीला सरकार में मंत्री रहे अरविंदर सिंह लवली पर दांव लगाया है, जो पिछले साल लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल हुए थे।

    हालांकि अरविंदर सिंह लवली 2017 के निगम चुनाव में भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे, लेकिन बाद में घर वापसी कर ली थी। यहां से आप की तरफ से ताल ठोंक रहे नवीन कुमार दीपू भी पांच साल पहले तक कांग्रेसी थे। 2020 के चुनाव में वह कांग्रेस छोड़कर आप में शामिल हो गए थे। चुनाव लड़े और हार गए थे। कांग्रेस की तरफ से इस सीट पर कमल अरोड़ा उम्मीदवार हैं।

    सीलमपुर सीट पर किसके बीच मुकाबला?

    इसी तरह से सीलमपुर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की तरफ से आप विधायक अब्दुल रहमान प्रत्याशी है। आप से टिकट कटने के बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए। उनके सामने मुकाबले में आप से उतरे चौधरी जुबेर करीब तीन महीने पहले तक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष थे। उनके पिता चौधरी मतीन अहमद कांग्रेस के बड़े नेताओं में शुमार हुआ करते थे। दोनों ने गत नवंबर में आप का दामन थाम लिया था।

    2017 से पहले पक्के कांग्रेसी थे अनिल कुमार शर्मा

    भाजपा के उम्मीदवार अनिल कुमार शर्मा 2017 से पहले तक पक्के कांग्रेसी थे। 2012 में निगम का चुनाव कांग्रेस से लड़े। 2017 में उनकी पत्नी कांग्रेस से ही निगम चुनाव में प्रत्याशी थीं। दोनों चुनाव में हार के बाद ये भाजपा में शामिल हो गए थे। 2020 के विधानसभा चुनाव से पहले घर वापसी की थी। लेकिन कुछ माह बाद फिर से भाजपा में आ गए।

    आप के वीर सिंह धिंगान भी थे कांग्रेसी

    2022 में मौजपुर से निगम का चुनाव लड़ा और पार्षद बन गए। इस बार पार्टी ने सीलमपुर में अपना चेहरा बनाया है। सीमापुरी विधानसभा क्षेत्र में भी ऐसी ही तस्वीर है। यहां भाजपा से रिंकू मैदान में हैं जो ढाई साल पहले तक कांग्रेसी थीं। दो बार उसी पार्टी की पार्षद रहीं।

    2022 के निगम चुनाव से पहले वह भाजपा में आ गईं थीं। चुनाव हार गईं। आप से चुनावी दमखम दिखा रहे वीर सिंह धिंगान भी कुछ माह पहले तक कांग्रेसी थे।

    1998 से 2013 तक पार्टी के विधायक रहे। इसके बाद के तीन चुनाव वह हार गए थे। चुनाव की घोषणा से पहले उन्होंने आप का दामन थाम लिया था। अब झाड़ू के निशान पर मैदान में हैं। कांग्रेस ने इस बार यहां से राजेश लिलोठिया को मैदान में उतारा है।

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