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    PM मोदी करेंगे मैजेंटा लाइन का उद्घाटन, CM केजरीवाल को न्योता तक नहीं भेजा

    By JP YadavEdited By:
    Updated: Mon, 25 Dec 2017 09:21 AM (IST)

    डीएमआरसी का कहना है कि उद्घाटन समारोह का आयोजन उत्तर प्रदेश सरकार ने किया है।

    PM मोदी करेंगे मैजेंटा लाइन का उद्घाटन, CM केजरीवाल को न्योता तक नहीं भेजा

    नई दिल्ली (जेएनएन)। सोमवार को मजेंटा लाइन के बोटेनिकल गार्डन-कालकाजी मंदिर कॉरिडोर पर देश की पहली स्वचालित मेट्रो ट्रेन के उद्घाटन से दिल्ली मेट्रो के इतिहास में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ जाएगी। 12.64 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का ज्यादातर हिस्सा और स्टेशन दिल्ली में है। इसके बावजूद पहले स्वचालित मेट्रो का श्रेय दिल्ली नहीं ले सकी, क्योंकि दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) व सूबे की सरकार ने दिल्ली में उद्घाटन समारोह आयोजित करने में रुचि नहीं दिखाई।

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    डीएमआरसी के इस मेट्रो कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह में दिल्ली सरकार भी आमंत्रित नहीं है, जबकि डीएमआरसी में केंद्र व दिल्ली सरकार की 50-50 फीसद हिस्सेदारी है। 38.23 किलोमीटर लंबी मजेंटा लाइन (बोटेनिकल गार्डन-जनकपुरी पश्चिम) का 34.27 किलोमीटर हिस्सा दिल्ली में है।

    मजेंटा लाइन पर तीन चरणों में मेट्रो का परिचालन शुरू करने की योजना है। पहले चरण में बोटेनिकल गार्डन से कालकाजी मंदिर के बीच स्वचालित तकनीक पर आधारित मेट्रो का उद्घाटन होना है।

    इस कॉरिडोर का 8.68 किलोमीटर हिस्सा (कालिंदी कुंज-कालकाजी मंदिर) दिल्ली में व 3.96 किलोमीटर हिस्सा (कालिंदी कुंज-बोटेनिकल गार्डन) नोएडा में बना है।

    इस कॉरिडोर पर स्थित नौ में से सात मेट्रो स्टेशन दिल्ली में व दो नोएडा में बने हैं। फिर भी उत्तर प्रदेश सरकार सक्रियता दिखाते हुए नोएडा में उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित करने में सफल रही और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमंत्रित कर लिया।

    डीएमआरसी का कहना है कि उद्घाटन समारोह का आयोजन उत्तर प्रदेश सरकार ने किया है, डीएमआरसी ने नहीं। इसलिए समारोह में अतिथियों के पास निमंत्रण भी उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से ही भेजे गए हैं, न कि डीएमआरसी की तरफ से। यह दिल्ली सरकार ही बता पाएगी कि उद्घाटन समारोह दिल्ली में क्यों नहीं किया गया।

    हालांकि फरीदाबाद-बदरपुर मेट्रो लाइन के उद्घाटन समारोह में भी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आमंत्रित नहीं थे। ध्यान देने वाली बात यह है कि वह कॉरिडोर पूरी तरह हरियाणा का हिस्सा है। उसके निर्माण का खर्च भी हरियाणा सरकार ने ही वहन किया था।